Delhi/UP: भारत सरकार ने कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों (Thermal Power Plants) के लिए सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन के नियमों को आसान कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब देश की करीब 78% से 79% बिजली क्षमता वाले प्ल
Delhi/UP: भारत सरकार ने कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों (Thermal Power Plants) के लिए सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन के नियमों को आसान कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब देश की करीब 78% से 79% बिजली क्षमता वाले प्लांट को FGD सिस्टम लगाने से छूट मिल गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब IIT Delhi की एक स्टडी में दावा किया गया कि SO2 को कम करने से सालाना 1.24 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सकती है।
नए नियमों के तहत प्लांट को कैसे बांटा गया?
पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) ने बिजली संयंत्रों को तीन कैटेगरी में बांटा है। Category A में वे प्लांट हैं जो NCR या 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के 10 किलोमीटर के दायरे में हैं, इनके लिए डेडलाइन दिसंबर 2027 तक बढ़ा दी गई है। Category B में गंभीर प्रदूषित क्षेत्रों के पास वाले प्लांट हैं, जिनके लिए फैसला केस-टू-केस आधार पर होगा। वहीं, Category C में आने वाले बाकी सभी प्लांट को SO2 मानकों से पूरी तरह छूट दे दी गई है, बशर्ते वे चिमनी की ऊंचाई के पुराने नियमों का पालन करें।
IIT Delhi की स्टडी में क्या कहा गया है?
IIT Delhi की अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग बातें सामने आई हैं। एक स्टडी के मुताबिक, पावर प्लांट के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शहरों में SO2 का स्तर 16.4 माइक्रोग्राम था, जबकि 25 किलोमीटर दूर यह सिर्फ 1.5 माइक्रोग्राम था। वहीं, एक अन्य रिसर्च में बताया गया कि पावर सेक्टर देश में PM2.5 प्रदूषण का बड़ा कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सभी प्लांट में FGD सिस्टम लगे, तो सालाना 48,000 समयपूर्व मौतों को रोका जा सकता है।
सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच क्या बहस है?
सरकार का कहना है कि भारतीय कोयले में सल्फर की मात्रा बहुत कम (0.5% से कम) है, इसलिए सख्त नियमों की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने इस कदम को विज्ञान आधारित प्रबंधन बताया है। दूसरी तरफ, CSE और CREA जैसे संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नियमों में ढील देने से जन स्वास्थ्य को खतरा बढ़ेगा और भारत के स्वच्छ हवा के लक्ष्य को नुकसान पहुंचेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
FGD सिस्टम क्या है और यह क्यों जरूरी है?
FGD का मतलब Flue Gas Desulphurisation है। यह एक ऐसी तकनीक है जो बिजली संयंत्रों की चिमनियों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस को सोख लेती है, जिससे हवा कम प्रदूषित होती है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है।
किन शहरों के पास वाले पावर प्लांट पर अभी भी नियम लागू रहेंगे?
NCR और उन शहरों के पास वाले प्लांट जो 10 किलोमीटर के दायरे में हैं और जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है, उन्हें Category A में रखा गया है। इन्हें दिसंबर 2027 तक प्रदूषण मानकों को पूरा करना होगा।