Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर एक बहुत बड़ी मीटिंग हुई। Bureau of Indian Standards (BIS) ने 4 मई से 8 मई 2026 तक ISO TC 20/SC 14 ‘Space Systems and Operations’ की 35वीं बैठक की मेज
Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर एक बहुत बड़ी मीटिंग हुई। Bureau of Indian Standards (BIS) ने 4 मई से 8 मई 2026 तक ISO TC 20/SC 14 ‘Space Systems and Operations’ की 35वीं बैठक की मेजबानी की। इसमें दुनिया के 33 देशों से 200 से ज्यादा एक्सपर्ट्स, स्पेस एजेंसियों के लोग और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए ताकि अंतरिक्ष में काम करने के ग्लोबल स्टैंडर्ड्स तय किए जा सकें।
इस मीटिंग में किन मुख्य बातों पर चर्चा हुई?
इस बैठक का मुख्य मकसद अंतरिक्ष प्रणालियों के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्च से लेकर उनकी सुरक्षा तक के नियम बनाना था। इसमें खासतौर पर अंतरिक्ष के कचरे (Orbital Debris), स्पेस एनवायरनमेंट और छोटे सैटेलाइट्स की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर बात की गई। भारत चाहता है कि आने वाले समय में स्पेस सेक्टर में उसकी भूमिका और बढ़े और भारतीय कंपनियां ग्लोबल लेवल पर मुकाबला कर सकें।
भारतीय स्पेस सेक्टर के लिए यह क्यों जरूरी है?
IN-SPACe के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका ने बताया कि भारत का स्पेस सेक्टर अब सरकारी नियंत्रण से निकलकर प्राइवेट सेक्टर की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मानकों (Standards) को अपनाना बहुत जरूरी है ताकि भारत में बनी स्पेस टेक्नोलॉजी दुनिया भर में स्वीकार की जाए। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे और BIS के महानिदेशक संजय गर्ग ने भी कहा कि पॉलिसी सुधारों के कारण भारत अब इनोवेशन का बड़ा केंद्र बन रहा है।
स्पेस सेक्टर में आने वाले बड़े बदलाव क्या होंगे?
अब जोर इस बात पर है कि केवल मैनेजमेंट न देखा जाए, बल्कि कमर्शियल स्पेस सिस्टम को कैसे बेहतर बनाया और टेस्ट किया जाए। BIS अब भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क के साथ जोड़ रहा है। इससे प्राइवेट कंपनियों के लिए काम करना आसान होगा और स्पेस मिशन ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ISO TC 20/SC 14 मीटिंग का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य स्पेस सिस्टम और ऑपरेशंस के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स तय करना था, जिसमें डिजाइन, लॉन्च सुरक्षा और अंतरिक्ष के कचरे (Orbital Debris) जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस आयोजन में कितने देशों ने हिस्सा लिया?
दिल्ली में आयोजित इस बैठक में दुनिया के 33 सदस्य देशों के 200 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्पेस एजेंसियां और इंडस्ट्री लीडर्स शामिल थे।