World : भारत और जर्मनी ने मिलकर पर्यावरण को बचाने और उद्योगों को आधुनिक बनाने के लिए हाथ मिलाया है। नई दिल्ली में जर्मन दूतावास में एक खास बैठक हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे ग्रीन टेक्नोलॉजी की मदद से आर्थिक
World : भारत और जर्मनी ने मिलकर पर्यावरण को बचाने और उद्योगों को आधुनिक बनाने के लिए हाथ मिलाया है। नई दिल्ली में जर्मन दूतावास में एक खास बैठक हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे ग्रीन टेक्नोलॉजी की मदद से आर्थिक विकास को बढ़ाया जा सकता है। इस साझेदारी का मकसद ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और दुनिया में भारत की स्थिति को बेहतर बनाना है।
भारत-जर्मनी साझेदारी में क्या खास है?
दोनों देशों ने मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप तैयार किया है। भारत 2070 तक और जर्मनी 2045 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रख रहे हैं। इसके तहत जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता कम की जाएगी और क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत के SIGHT प्रोग्राम के जरिए इलेक्ट्रोलाइजर बनाने वाली कंपनियों को मदद मिलेगी, जिसमें जर्मनी की कंपनियां भी हिस्सा ले सकती हैं।
पर्यावरण और इकोसिस्टम के लिए क्या योजना है?
जर्मनी ने भारत के लिए 20 मिलियन यूरो (लगभग 2 करोड़ यूरो) का एक बड़ा अनुदान प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह पैसा इंटरनेशनल क्लाइमेट इनिशिएटिव (IKI) के तहत दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उन इलाकों को सुरक्षित करना है जहाँ जोखिम ज्यादा है, जैसे कि:
- हिमालय के पहाड़ी इलाके
- द्वीप क्षेत्र (Island regions)
- पश्चिमी घाट (Western Ghats)
- उत्तर-पूर्व भारत और गंगा के निचले मैदानी इलाके
जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि भारत ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और साफ तकनीक के मामले में दुनिया का एक बड़ा पार्टनर बन सकता है।
आम लोगों और उद्योगों पर क्या असर होगा?
इस समझौते से भारत में नए ग्रीन जॉब्स पैदा होंगे और प्रदूषण कम करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा। इकोसिस्टम आधारित तरीकों से न केवल जलवायु जोखिम कम होगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की कमाई के साधन भी बढ़ेंगे। यह कदम भारत के नेशनल अडैप्टेशन प्लान (NAP) को मजबूत करने में मदद करेगा, जिससे जंगलों और जैव विविधता का संरक्षण होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप क्या है?
यह भारत और जर्मनी के बीच एक समझौता है जिसका लक्ष्य 2070 (भारत) और 2045 (जर्मनी) तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है। इसमें जीवाश्म ईंधन को छोड़कर ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी को अपनाने पर जोर दिया गया है।
जर्मनी ने भारत को कितनी आर्थिक मदद दी है?
जर्मनी ने इंटरनेशनल क्लाइमेट इनिशिएटिव (IKI) के तहत 20 मिलियन यूरो का अनुदान दिया है। इस राशि का उपयोग हिमालय, पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील इलाकों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए किया जाएगा।