India में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पहली स्वदेशी वैक्सीन तैयार, Chhattisgarh के सरगुजा में सफल रहा ट्रायल
Delhi: भारत ने पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। देश में पहली बार अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की स्वदेशी वैक्सीन विकसित की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में इसे राष्ट्र को समर
Delhi: भारत ने पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। देश में पहली बार अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की स्वदेशी वैक्सीन विकसित की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में इसे राष्ट्र को समर्पित किया। यह वैक्सीन सूअर पालने वाले किसानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि इस बीमारी से सूअरों की मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक होती थी।
इस वैक्सीन का पहला सफल फील्ड ट्रायल Chhattisgarh के सरगुजा जिले में स्थित शासकीय सुकर फार्म सकालो, अंबिकापुर में किया गया था। जुलाई 2026 के मध्य तक यहाँ वैज्ञानिकों ने नमूने एकत्र किए और परीक्षण पूरे किए। इस वैक्सीन को ICAR–राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल की टीम ने तैयार किया है। इस टीम में डॉ. अनिकेत सान्याल, डॉ. डी. सेंथिल कुमार, डॉ. के. राजूकुमार, डॉ. जी. वेंकटेश और डॉ. फतेह सिंह जैसे वैज्ञानिक शामिल रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह और ICAR के महानिदेशक एम.एल. जाट भी मौजूद थे। यह वैक्सीन MA-104 सेल-आधारित लाइव एटेन्यूटेड वैक्सीन है। इसे इस तरह बनाया गया है कि इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर करना आसान और सस्ता होगा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| वैक्सीन का नाम | MA-104 सेल-आधारित लाइव एटेन्यूटेड ASF वैक्सीन |
| खुराक | 1 मिलीलीटर (गर्दन की मांसपेशी में) |
| बूस्टर डोज | पहली खुराक के 14 दिन बाद |
| प्रभाव | 6 महीने तक रोग-प्रतिरोधक क्षमता |
| उपयोग | 8 सप्ताह से अधिक उम्र के स्वस्थ सूअरों के लिए |
| वैश्विक स्थिति | वियतनाम के बाद भारत दूसरा देश बना |
भारत में यह बीमारी पहली बार साल 2020 में देखी गई थी। मिजोरम जैसे राज्यों में 2021 से इस बीमारी की वजह से करीब 960 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब इस स्वदेशी वैक्सीन के आने से न केवल भारत आत्मनिर्भर होगा, बल्कि भविष्य में भारत इस वैक्सीन का निर्यात अन्य देशों को भी कर सकेगा।