Maharashtra: कल्याण ग्रामीण, अंबरनाथ और बदलापुर के गांवों में एक बार फिर अवैध जींस डाइंग यूनिट्स ने पैर पसार लिए हैं। लगभग 10 साल पहले उल्हासनगर में प्रदूषण की वजह से इन्हें बंद किया गया था, लेकिन अब ये फैक्ट्रियां चुपके
Maharashtra: कल्याण ग्रामीण, अंबरनाथ और बदलापुर के गांवों में एक बार फिर अवैध जींस डाइंग यूनिट्स ने पैर पसार लिए हैं। लगभग 10 साल पहले उल्हासनगर में प्रदूषण की वजह से इन्हें बंद किया गया था, लेकिन अब ये फैक्ट्रियां चुपके से ग्रामीण इलाकों में शिफ्ट हो गई हैं। ये इकाइयां बिना किसी ट्रीटमेंट के जहरीले केमिकल नदियों और बोरवेल के पानी में बहा रही हैं, जिससे खेती और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
कौन सी नदियां और इलाके हुए प्रभावित
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इन अवैध फैक्ट्रियों का केमिकल कचरा सीधे तौर पर कसाडी, मुकी, गवर, वलधुनी और उल्हास नदियों में जा रहा है। इसके अलावा करोले, उसतने, मलंगवाड़ी, वसार, चिंचपाड़ा, वंगणी, दहगाँव, वावोली और वाडेघर जैसे गांवों का भूजल भी प्रदूषित हो गया है। ठाणे जिले के नदी संरक्षण कार्यकर्ता शशिकांत दायमा ने बताया कि पिछले कुछ सालों में यह समस्या बहुत बढ़ गई है क्योंकि उल्हासनगर से हटने के बाद ऑपरेटर दूर-दराज के गांवों में बस गए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति
MPCB और स्थानीय नगर निगमों ने समय-समय पर कार्रवाई की है। जनवरी 2025 में KDMC और MPCB ने कल्याण ईस्ट के चिंचपाड़ा में 22 अवैध फैक्ट्रियों को ढहा दिया था। इससे पहले 2017 में उल्हासनगर में पानी की सप्लाई काटने और 2021 में अंबरनाथ में पांच यूनिट्स को नोटिस जारी करने की कार्रवाई हुई थी। हालांकि, आरोप है कि कई जमींदार MPCB के नोटिस को नजरअंदाज कर रहे हैं और लाखों रुपये के बिजली बिल बकाया होने के बावजूद इन फैक्ट्रियों पर कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया है।
नियम क्या हैं और सरकार का अगला कदम क्या है
जींस डाइंग, ब्लीचिंग और प्रिंटिंग का काम ‘रेड-कैटेगरी’ इंडस्ट्री में आता है क्योंकि इससे प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है। ऐसे उद्योगों के लिए वाटर एक्ट 1974, एयर एक्ट 1981 और खतरनाक कचरा नियमों के तहत मंजूरी लेना जरूरी है। अप्रैल 2026 में पर्यावरण मंत्री पंकज मुंडे ने एक बैठक की, जिसमें प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों पर जुर्माना और बैंक गारंटी बढ़ाने का फैसला लिया गया। आने वाले समय में ऐसी फैक्ट्रियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला जाएगा ताकि वे नियमों का पालन करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इन अवैध फैक्ट्रियों से पानी पर क्या असर पड़ रहा है?
ये फैक्ट्रियां बिना ट्रीटमेंट के केमिकल कचरा कसाडी, मुकी और उल्हास जैसी नदियों में बहा रही हैं, जिससे नदियां जहरीली हो गई हैं और गांवों के बोरवेल का पानी भी पीने लायक नहीं रहा है।
प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
KDMC और MPCB ने जनवरी 2025 में चिंचपाड़ा में 22 फैक्ट्रियां गिराईं और अंबरनाथ में कई यूनिट्स को क्लोजर नोटिस दिए, लेकिन कई जगह नोटिस के बावजूद काम जारी है।