Delhi: IIT Delhi ने दवा और वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक नया तरीका निकाला है। अब वैज्ञानिकों को वायरस और बैक्टीरिया के सेल्स से प्रोटीन को अलग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे रिसर्च का काम काफी आसान ह
Delhi: IIT Delhi ने दवा और वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक नया तरीका निकाला है। अब वैज्ञानिकों को वायरस और बैक्टीरिया के सेल्स से प्रोटीन को अलग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे रिसर्च का काम काफी आसान हो जाएगा। इस नई तकनीक की जानकारी ‘Central Research Facility (CRF) Day 2026’ के दौरान दी गई।
क्या है यह नई तकनीक और कैसे काम करती है
IIT Delhi अब Cryo-Electron Tomography का इस्तेमाल करेगा। इस तकनीक के लिए संस्थान ने 2022 में नीदरलैंड से लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से एक Cryo-Transmission Electron Microscope खरीदा था। इसमें प्रोटीन को -190 डिग्री सेल्सियस पर रखकर उनकी तस्वीरें ली जाती हैं। यह मशीन रोबोटिक ऑटो-लोडर से चलती है, जिससे 12-14 घंटे में 5 से 7 हजार तस्वीरें मिल जाती हैं और इसमें इंसानी दखल बहुत कम होता है।
संस्थान के अधिकारियों ने क्या कहा
IIT Delhi के डायरेक्टर Prof. Rangan Banerjee ने बताया कि Central Research Facility का मकसद दुनिया के स्तर की रिसर्च सुविधाएं देना है ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान मिल सके। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए यह सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। वहीं, Saathi Foundation की फैसिलिटी मैनेजर Dr. Kimmi Azad ने बताया कि अब सेल से प्रोटीन अलग करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे काम की रफ्तार बढ़ेगी। CRF की चेयरमैन Prof. Manidipa Banerjee ने भी इस सुविधा के फायदों के बारे में जानकारी दी।
IIT Delhi की अन्य महत्वपूर्ण खोजें
दवाइयों के क्षेत्र में IIT Delhi पहले भी कई काम कर चुका है। फरवरी 2023 में संस्थान ने कोविड-19 के लिए एक ‘नेक्स्ट जनरेशन’ नैनो-वैक्सीन बनाई थी, जिसका असर जानवरों पर सफल रहा। इसके अलावा, फरवरी 2022 में जापानी इंसेफलाइटिस और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए एक नया तरीका डिजाइन किया गया था। हाल ही में संस्थान ने ‘AILA’ नाम का एक AI एजेंट भी बनाया है, जो लैब में इंसानों की तरह वैज्ञानिक प्रयोग कर सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IIT Delhi की नई तकनीक से दवा खोजने में क्या बदलाव आएगा
अब Cryo-Electron Tomography की मदद से वायरस और बैक्टीरिया के सेल्स से प्रोटीन को अलग किए बिना ही उनकी जांच की जा सकेगी, जिससे वैक्सीन और दवा बनाने का समय बचेगा।
इस रिसर्च के लिए कौन सी मशीन का इस्तेमाल हो रहा है
इसके लिए Cryo-Transmission Electron Microscope का उपयोग किया जा रहा है, जिसे 2022 में नीदरलैंड से करीब 25 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।