IIMC ने उर्दू जर्नलिज्म कोर्स को किया होल्ड, दिल्ली हाई कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद लिया फैसला

Delhi: भारतीय जनसंचार संस्थान यानी IIMC ने अपने एक साल के उर्दू जर्नलिज्म पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स को सत्र 2026-27 के लिए रोक दिया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे एक कानूनी विवाद और कोर्स में कम छात्रों के

Delhi: भारतीय जनसंचार संस्थान यानी IIMC ने अपने एक साल के उर्दू जर्नलिज्म पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स को सत्र 2026-27 के लिए रोक दिया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे एक कानूनी विवाद और कोर्स में कम छात्रों के आने के बाद लिया गया है। इस खबर से उन छात्रों को झटका लगा है जो उर्दू भाषा में पत्रकारिता की पढ़ाई करना चाहते थे।

पूरा मामला प्रवेश परीक्षा की भाषा को लेकर शुरू हुआ। शुरुआत में IIMC ने नोटिफिकेशन निकाला था कि छात्र परीक्षा के उत्तर हिंदी या उर्दू किसी भी भाषा में दे सकते हैं। लेकिन बाद में संस्थान ने इस नियम को बदलकर केवल उर्दू लिपि को अनिवार्य कर दिया। जब इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, तो IIMC ने कोर्ट को बताया कि पहला नोटिफिकेशन एक गलती थी और संस्थान की हमेशा से यही पॉलिसी रही है कि उर्दू जर्नलिज्म की परीक्षा सिर्फ उर्दू लिपि में ही होगी। संस्थान का कहना है कि वह परीक्षा के मानक तय करने के लिए स्वतंत्र है और देवनागरी लिपि की अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं है।

इस विवाद में झारखंड की रहने वाली उपासना कुमारी ने अनिवार्य उर्दू लिपि के नियम को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। वकील अभिषेक कुमार ने बताया कि इस विवाद और कम आवेदन मिलने के कारण अब कोर्स को 2026-27 के लिए होल्ड पर रख दिया गया है। IIMC ने कोर्ट को एक हलफनामे में बताया कि इस साल केवल चार आवेदन आए थे, जिनमें से दो छात्रों ने उर्दू की अनिवार्यता के कारण अपना नाम वापस ले लिया।

संस्थान के गेस्ट फैकल्टी और पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्रा ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने एक वीडियो अपील के जरिए कहा कि अगर कोर्स को अस्थायी रूप से बंद किया गया, तो भविष्य में यह पूरी तरह से खत्म भी हो सकता है। इस मामले में जब IIMC के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश गोस्वामी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंत तक होने की उम्मीद है।