Finance : भारत में प्लास्टिक कचरे और ईंधन की कमी जैसी दो बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए Hydroxy Vishwa Pvt. Ltd. (HVPL) ने एक नई तकनीक विकसित की है। यह कंपनी अब बेकार प्लास्टिक को ऑटोमोटिव ग्रेड फ्यूल यानी पेट्रोल, डीजल
Finance : भारत में प्लास्टिक कचरे और ईंधन की कमी जैसी दो बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए Hydroxy Vishwa Pvt. Ltd. (HVPL) ने एक नई तकनीक विकसित की है। यह कंपनी अब बेकार प्लास्टिक को ऑटोमोटिव ग्रेड फ्यूल यानी पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल में बदलने का दावा कर रही है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को पूरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
HVPL की इस नई तकनीक में क्या है खास
कंपनी ने इस तकनीक के लिए पेटेंट नंबर 562285 (2025) और 574603 (2025) हासिल किए हैं। इस सिस्टम की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें प्लास्टिक को धोने या अलग-अलग छाँटने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मशीन उन प्लास्टिक कचरे को भी ईंधन में बदल सकती है जिन्हें रीसायकल करना बहुत मुश्किल होता है। यह पूरी प्रक्रिया प्रदूषण मुक्त है और इसमें कोई हानिकारक गैस नहीं निकलती।
कैसे काम करती है यह मशीन और क्या होगा फायदा
यह तकनीक डिपोलीमराइजेशन प्रोसेस पर काम करती है। इसमें प्लास्टिक कचरे को सब्लिमेशन, कंडेनसेशन और डिस्टिलेशन के जरिए सीधे ईंधन में बदला जाता है। इससे भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और शहरों में जमा होने वाले प्लास्टिक कचरे का सही निपटारा हो सकेगा।
- उत्पाद: पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल और कीमती केमिकल
- खासियत: जीरो प्रदूषण और जीरो वेस्ट सिस्टम
- लक्ष्य: प्लास्टिक प्रदूषण कम करना और ईंधन उत्पादन बढ़ाना
- स्थापना: कंपनी 8 जुलाई 2025 को रजिस्टर हुई थी
Frequently Asked Questions (FAQs)
HVPL की तकनीक प्लास्टिक से क्या-क्या बना सकती है?
Hydroxy Vishwa Pvt. Ltd. की पेटेंट तकनीक से बिना धुले और बिना छाँटे गए प्लास्टिक कचरे को डीजल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल (Kerosene) और अन्य उपयोगी केमिकल्स में बदला जा सकता है।
क्या इस प्रक्रिया से प्रदूषण फैलता है?
नहीं, यह एक क्लोज-लूप और प्रदूषण मुक्त प्लेटफॉर्म है। यह पारंपरिक तरीकों जैसे कि जलाने (Incineration) के मुकाबले पूरी तरह साफ है और इसमें कोई सेकेंडरी वेस्ट नहीं निकलता।