Lucknow में हेल्पएज इंडिया ने जारी की रिपोर्ट, बताया जलवायु परिवर्तन से बुजुर्गों पर बढ़ रहा है खतरा

Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय के राधा कमल मुखर्जी सभागार में विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के मौके पर हेल्पएज इंडिया ने एक खास कार्यक्रम किया। इस दौरान ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट एजिंग: देखभाल, गरिमा और सहभागिता सुन

Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय के राधा कमल मुखर्जी सभागार में विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के मौके पर हेल्पएज इंडिया ने एक खास कार्यक्रम किया। इस दौरान ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट एजिंग: देखभाल, गरिमा और सहभागिता सुनिश्चित करना’ नाम की एक नेशनल रिपोर्ट लॉन्च की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे बदलता मौसम और जलवायु परिवर्तन बुजुर्गों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है।

हेल्पएज इंडिया के CEO रोहित प्रसाद ने कहा कि जब भी किसी आपदा या मौसम के बदलाव की बात होती है, तो बुजुर्गों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि वे सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। इस कार्यक्रम में शर्मिला टैगोर, किरण कार्णिक, रुमझुम चटर्जी और अमरजीत सिन्हा ने भी अपने विचार रखे और बुजुर्गों की स्थिति पर चर्चा की।

रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों पर गर्मी, बाढ़ और सूखे का सबसे बुरा असर पड़ रहा है। इससे न केवल उनकी सेहत बिगड़ रही है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी कमजोर हो रहे हैं और समाज से कट रहे हैं। सर्वे में शामिल 78 प्रतिशत बुजुर्गों ने पिछले तीन सालों में किसी न किसी तरह के जलवायु खतरे का सामना किया है।

खतरा/प्रभाव प्रतिशत/विवरण
गर्मी की लहरें (Heatwaves) 45% बुजुर्ग प्रभावित
बाढ़ (Floods) 27% बुजुर्ग प्रभावित
सूखा (Drought) 20% बुजुर्ग प्रभावित
बीमारी की शिकायत 74% बुजुर्गों ने बताई
दवा खरीदने में असमर्थता 52% से ज्यादा बुजुर्ग
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में दिक्कत 33% बुजुर्ग

रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं, विधवाएं हैं या जिनकी उम्र 80 साल से ज्यादा है, उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मानसिक स्वास्थ्य और बातचीत करने में परेशानी वाले लोग भी ज्यादा जोखिम में हैं। हालांकि परिवार आज भी बुजुर्गों के सहारे का मुख्य जरिया हैं, लेकिन युवाओं के काम के लिए बाहर जाने (प्रवासन) की वजह से देखभाल करने वालों की कमी हो रही है।

हेल्पएज इंडिया ने सुझाव दिया है कि सरकार की नीतियों में बुजुर्गों की जरूरतों को शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक सहायता तंत्र को मजबूत करने की मांग की गई है ताकि बुजुर्ग सम्मान के साथ जी सकें और आपदाओं का सामना कर सकें।