Maharashtra: मुंबई के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि भारत में कैंसर के कुल मामलों में सिर और गले का कैंसर लगभग 40% है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर मरीजों में इसका पता बहुत देर से चलता है। अब डॉक्टरों ने सलाह दी है क
Maharashtra: मुंबई के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि भारत में कैंसर के कुल मामलों में सिर और गले का कैंसर लगभग 40% है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर मरीजों में इसका पता बहुत देर से चलता है। अब डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर लोग महीने में सिर्फ दो मिनट निकालकर खुद अपनी जांच करें, तो इस बीमारी को शुरुआती स्टेज पर ही पकड़ा जा सकता है और जान बचाई जा सकती है।
खुद की जांच कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें?
डॉक्टर अभिषेक आनंद ने बताया कि कैंसर से बचने के लिए ‘देखो, महसूस करो और कदम उठाओ’ का तरीका अपनाना चाहिए। इसके लिए नीचे दी गई बातों पर गौर करें:
- देखो: मुंह में कोई सफेद या लाल पैच, न भरने वाले छाले या दांतों का अचानक ढीला होना।
- महसूस करो: गले या मुंह में कोई गांठ, सूजन, आवाज में भारीपन या निगलने में दिक्कत।
- कदम उठाओ: अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कौन लोग हैं ज्यादा खतरे में और क्या हैं आंकड़े?
सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सेवंती लिमाये के मुताबिक, अब यह बीमारी सिर्फ तंबाकू खाने वालों को ही नहीं, बल्कि 30 से 50 साल के युवाओं को भी हो रही है। इसका कारण खराब ओरल हाइजीन और HPV जैसे वायरस हैं। नेशनल ओरल कैंसर रजिस्ट्री के मुताबिक भारत में हर घंटे ओरल कैंसर से 5 लोगों की मौत हो रही है।
| मुख्य बिंदु |
जानकारी |
| कुल कैंसर बोझ |
लगभग 40% Head and Neck Cancer |
| देरी से पहचान |
60% से 90% मामले एडवांस स्टेज पर मिलते हैं |
| नॉन-तंबाकू यूजर |
मामलों में करीब 20% की बढ़ोतरी |
| सालाना मरीज |
लगभग 2 लाख नए मरीज |
सरकार और संस्थाओं की क्या तैयारी है?
भारत में इस बीमारी से लड़ने के लिए Oral Cancer Task Force (OCTF) ने खास गाइडलाइंस बनाई हैं। सरकार ने NPCDCS और आयुष्मान भारत जैसे प्रोग्राम शुरू किए हैं, जिनमें मोबाइल स्क्रीनिंग यूनिट और हेल्थ वर्कर्स की ट्रेनिंग शामिल है। हालांकि, NFHS-5 की रिपोर्ट कहती है कि देश में ओरल कैंसर स्क्रीनिंग की कवरेज 1% से भी कम है, जिसे सुधारने की जरूरत है।