UP : हाथरस के सादाबाद इलाके में स्थित प्राचीन बनखंडी महादेव मंदिर के पौराणिक कुंड की हालत खराब है। इसे फिर से ठीक कराने और पुनरुद्धार की मांग को लेकर अब स्थानीय किसानों और शिवभक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। इस मांग को सरका
UP : हाथरस के सादाबाद इलाके में स्थित प्राचीन बनखंडी महादेव मंदिर के पौराणिक कुंड की हालत खराब है। इसे फिर से ठीक कराने और पुनरुद्धार की मांग को लेकर अब स्थानीय किसानों और शिवभक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। इस मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए लोगों ने लखनऊ तक पदयात्रा करने की तैयारी कर ली है और इसके लिए जिलाधिकारी से अनुमति मांगी है।
क्यों हो रहा है लखनऊ के लिए मार्च
सादाबाद क्षेत्र के बनखंडी महादेव मंदिर का कुंड काफी पुराना और पौराणिक है। स्थानीय लोगों और शिवभक्तों का कहना है कि इस कुंड का जीर्णोद्धार होना जरूरी है ताकि इसकी पवित्रता और सुंदरता बनी रहे। जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो किसानों और भक्तों ने तय किया कि वे लखनऊ जाकर शासन प्रशासन से अपनी मांग रखेंगे।
मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार की क्या है नीति
उत्तर प्रदेश सरकार वर्तमान में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार उन मंदिरों के नवीनीकरण को प्राथमिकता दे रही है जो जनपदीय संरक्षित श्रेणी में आते हैं या जिनका ऐतिहासिक महत्व है। ऐसी परियोजनाओं में सरकार उन प्रस्तावों को पहले मानती है जहां कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा दान या CSR फंड के जरिए जुटाया जा सके।
अन्य बनखंडी महादेव मंदिरों की स्थिति
उत्तर प्रदेश में बनखंडी महादेव के नाम से कई मंदिर हैं। वाराणसी, सरसावा (सहारनपुर), कैराना और वृंदावन में भी इस नाम के मंदिर स्थित हैं। इनमें से कुछ मंदिरों का कायाकल्प पहले ही हो चुका है और कुछ पर काम चल रहा है। उदाहरण के तौर पर, वृंदावन के प्राचीन वनखंडी महादेव मंदिर का विकास कार्य किया गया है और लखनऊ के कोनेश्वर महादेव मंदिर के लिए भी बजट आवंटित किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हाथरस के किसान लखनऊ क्यों जाना चाहते हैं?
हाथरस के सादाबाद क्षेत्र में स्थित प्राचीन बनखंडी महादेव मंदिर के पौराणिक कुंड के पुनरुद्धार की मांग को लेकर किसान और शिवभक्त लखनऊ पदयात्रा करना चाहते हैं।
यूपी सरकार मंदिरों के नवीनीकरण के लिए क्या शर्त रखती है?
सरकार उन प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देती है जिनमें बहाली की लागत का 50% हिस्सा दान, CSR फंड या अन्य निजी स्रोतों से कवर किया जा सके।