Jharkhand: गुमला जिले से आदिवासी समाज के 518 लोग दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। ये लोग जनजातीय सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले आयोजित ‘हुंकार रैली’ में शामिल होने जा रहे हैं। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन आदिव
Jharkhand: गुमला जिले से आदिवासी समाज के 518 लोग दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। ये लोग जनजातीय सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले आयोजित ‘हुंकार रैली’ में शामिल होने जा रहे हैं। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षण सूची से बाहर करना है जिन्होंने अपना धर्म बदल लिया है।
क्या है डिलिस्टिंग की मांग और क्यों हो रहा है आंदोलन?
जनजातीय सुरक्षा मंच का कहना है कि जिन आदिवासियों ने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है और अब वे अपनी पारंपरिक संस्कृति और पूजा पद्धति को नहीं मानते, उन्हें ST आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। JSM चाहता है कि संविधान के अनुच्छेद 342A में बदलाव किया जाए ताकि धर्म परिवर्तन के बाद ST दर्जा अपने आप खत्म हो जाए। इस मांग को लेकर 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किले मैदान में एक बड़ी रैली होगी, जिसमें देशभर से लाखों आदिवासियों के जुटने की उम्मीद है।
रैली में कौन शामिल होगा और क्या है सरकारी रुख?
इस रैली में गुमला के अलावा गुजरात से भी 6,000 लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। JSM के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपेंगे। जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने भी धर्मांतरित लोगों के आदिवासी दर्जे की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं।
विरोध करने वाले समूहों का क्या कहना है?
इस आंदोलन के खिलाफ झारखंड के 100 से ज्यादा आदिवासी नेताओं और बुद्धिजीवियों ने अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने इस रैली का बहिष्कार करने की अपील की है। विरोध करने वालों का तर्क है कि ST दर्जा धर्म के आधार पर नहीं दिया जाता है और ऐसी मांग आदिवासी समाज को बांटने वाली और असंवैधानिक है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हुंकार रैली कब और कहां आयोजित होगी?
यह रैली 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किले मैदान में आयोजित होगी, जिसमें जनजातीय सुरक्षा मंच के नेतृत्व में देशभर के आदिवासी जुटेंगे।
डिलिस्टिंग बिल की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग यह है कि जो आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, उन्हें ST आरक्षण सूची से हटाया जाए ताकि आरक्षण का लाभ केवल पारंपरिक संस्कृति को मानने वाले आदिवासियों को मिले।