UP: ग्रेटर नोएडा के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर शासन ने 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, तो वे लखनऊ तक पैदल मार्च करेंगे
UP: ग्रेटर नोएडा के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर शासन ने 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, तो वे लखनऊ तक पैदल मार्च करेंगे। किसान नेताओं का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में काफी धांधली हो रही है और जानबूझकर उनकी मांगों को लटकाया जा रहा है।
लखनऊ कूच कब होगा और क्या है किसानों की योजना
किसानों ने तय किया है कि यदि 27 जून, 2026 तक उनकी मांगों पर शासन की मंजूरी नहीं मिली, तो 29 जून, 2026 को लखनऊ के लिए पैदल कूच शुरू होगा। इस बड़े आंदोलन की तैयारी के लिए 16 जून, 2026 से सभी गांवों में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO को पहले ही पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया है।
क्या है 4 प्रतिशत आबादी भूखंड का पूरा विवाद
किसानों की मुख्य मांग है कि अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें 4 प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड दिए जाएं। दरअसल, 1997 में एक आदेश के जरिए 10 प्रतिशत भूखंड का प्रावधान था और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इसके निर्देश दिए थे। प्राधिकरण की बोर्ड बैठकों में भी इसे मंजूरी मिली थी और जनवरी 2024 में प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक शासन स्तर से अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।
प्राधिकरण पर धांधली के आरोप और अन्य घटनाक्रम
चौधरी प्रकाश प्रधान और अधिवक्ता विनोद कुमार वर्मा जैसे किसान नेताओं का कहना है कि नियोजन विभाग मनमानी कर रहा है और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। वहीं एक अलग घटनाक्रम में, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले 160 किसान 15 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करने लखनऊ जाएंगे। यह यात्रा वर्तमान विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों से बिल्कुल अलग है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्रेटर नोएडा के किसान लखनऊ कूच कब कर रहे हैं?
यदि 27 जून, 2026 तक उनकी मांगों को मंजूरी नहीं मिली, तो किसान 29 जून, 2026 को लखनऊ के लिए पैदल कूच करेंगे।
किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसान अपनी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड की मांग कर रहे हैं और प्राधिकरण में हो रही कथित धांधली को रोकने की मांग कर रहे हैं।