गांगनौली में दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर पर कट की मांग को लेकर 80 दिन से धरना, ग्रामीणों ने दी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

Haryana/UP: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर गांगनौली गांव के पास कट की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना 80 दिनों से ज्यादा समय से चल रहा है। किसान और ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि यह कट उनके क्षे

Haryana/UP: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर गांगनौली गांव के पास कट की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना 80 दिनों से ज्यादा समय से चल रहा है। किसान और ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि यह कट उनके क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी है। इस आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और नेता राजेंद्र चौधरी जैसे बड़े नेताओं का समर्थन मिल रहा है।

एनएचएआई (NHAI) के नियमों के मुताबिक इस एक्सप्रेसवे पर बाइक, ऑटो और ट्रैक्टर जैसे वाहनों का जाना पूरी तरह मना है। सड़क पर कहीं भी रुकना या मुड़ना प्रतिबंधित है और नियमों को तोड़ने वालों का चालान इलेक्ट्रॉनिक कैमरों से किया जा रहा है। एनएचएआई ने गांगनौली के पास एक अस्थायी कट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। प्रशासन इसे सुरक्षा का तरीका बता रहा है, लेकिन ग्रामीणों को डर है कि इससे उन पर कानूनी कार्रवाई और चालान किए जाएंगे।

विवाद इतना बढ़ गया है कि एनएचएआई ने कई बार इस अस्थायी कट को बंद करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण अधिकारियों को वापस जाना पड़ा। मामला कानूनी रूप से भी गरमाया हुआ है क्योंकि 6 जुलाई 2026 को कॉरिडोर का एक हिस्सा धंसने के बाद धरने से जुड़े 14 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। मार्च 2026 में अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि इस समस्या का समाधान उच्च स्तर पर किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

बीकेयू नेता राजेंद्र चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर साफ कहा है कि जब तक कट नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। वहीं दूसरी तरफ, 23 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार इस कॉरिडोर से 60 दिनों में 27.67 लाख से ज्यादा वाहन गुजरे हैं, जिससे दिल्ली से देहरादून का सफर अब ढाई से तीन घंटे में पूरा हो रहा है। प्रशासन ने 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए कांवड़ियों के इस एक्सप्रेसवे पर चलने पर रोक लगा दी है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कांवड़िये इस रास्ते का इस्तेमाल न करें।