Finance : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Raheja Developers और उसके सीएमडी Navin M. Raheja समेत उनके परिवार और जुड़ी कंपनियों की करीब 1,113.81 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में क
Finance : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Raheja Developers और उसके सीएमडी Navin M. Raheja समेत उनके परिवार और जुड़ी कंपनियों की करीब 1,113.81 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में की गई है। आरोप है कि कंपनी ने हजारों घर खरीदारों से पैसे लिए लेकिन उन्हें उनके फ्लैट नहीं दिए।
ED ने क्या कार्रवाई की और क्या मिला
ED ने 28 अप्रैल 2026 को संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया। इससे पहले 25 अप्रैल को दिल्ली-NCR में सात अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान अधिकारियों को 15.82 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट और 15 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा मिली है। यह पूरी जांच PMLA कानून के तहत की जा रही है।
कितने लोगों के साथ हुई धोखाधड़ी और कितना पैसा डूबा
ED का कहना है कि कंपनी ने करीब 4,600 होमबायर्स से कुल 2,425.99 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे। इनमें ‘Raheja Revanta’ जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। नियमों के मुताबिक खरीदारों के पैसे का 70% हिस्सा अलग एस्क्रो अकाउंट में रखना होता है ताकि निर्माण कार्य पूरा हो सके, लेकिन आरोप है कि इस पैसे को शेल कंपनियों के जरिए डायरेक्टर और उनके करीबियों के पास भेज दिया गया।
Raheja Developers ने अपनी सफाई में क्या कहा
| मुख्य बिंदु |
कंपनी का पक्ष / विवरण |
| फंड डायवर्जन |
कंपनी ने कहा कि कोई पैसा इधर-उधर नहीं किया गया और ऑडिट में इसकी पुष्टि हुई है। |
| निवेश |
दावा किया कि ग्राहकों से मिले पैसों से ज्यादा निवेश प्रोजेक्ट्स में किया गया। |
| देरी का कारण |
‘Raheja Revanta’ प्रोजेक्ट में देरी सरकारी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी की वजह से हुई। |
| भुगतान |
कंपनी का कहना है कि उन्होंने EDC/IDC के सभी सरकारी शुल्क पूरे भर दिए हैं। |
Frequently Asked Questions (FAQs)
ED ने Raheja Developers की कितनी संपत्ति जब्त की है?
ED ने 28 अप्रैल 2026 को Raheja Developers, उसके सीएमडी Navin M. Raheja और संबंधित संस्थाओं की कुल 1,113.81 करोड़ रुपये की संपत्ति को प्रोविजनली अटैच किया है।
कितने होमबायर्स इस मामले से प्रभावित हैं?
जांच के अनुसार, लगभग 4,500 से 4,600 होमबायर्स ने विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये दिए थे, जिन्हें समय पर फ्लैट नहीं मिले।