Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को लेकर कड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ने कॉलेज द्वारा शॉर्टलिस्टिंग के नियमों की अनदेखी करने का आरोप लग
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को लेकर कड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ने कॉलेज द्वारा शॉर्टलिस्टिंग के नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। यह फैसला 29 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति योगेश सिंह ने की थी।
भर्ती में क्या हुई गड़बड़ी और क्या हैं नियम?
यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू के लिए पहली वैकेंसी के लिए 40 उम्मीदवार और उसके बाद की हर वैकेंसी के लिए 20 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना होता है। आरोप है कि St Stephen’s College ने इस नियम को ताक पर रखकर हर अनारक्षित (unreserved) सीट के लिए 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर लिया। यूनिवर्सिटी ने इसे गलत माना है और कॉलेज को सलाह दी है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी उम्मीदवार को अपॉइंटमेंट लेटर न दिया जाए।
जांच के लिए कौन सी कमेटी बनी है?
इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की कमान प्रोफेसर इंदर मोहन कापाही के हाथों में सौंपी गई है, जो चांसलर के नॉमिनी हैं। कमेटी में अमन कुमार, डॉ. मोनिका अरोड़ा और डॉ. एल.एस. चौधरी भी शामिल हैं, जबकि जॉइंट रजिस्ट्रार (कॉलेजेज) इसके मेंबर सेक्रेटरी होंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने इस फैसले की आधिकारिक जानकारी सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र भेजकर दे दी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सेंट स्टीफंस कॉलेज में नियुक्तियां क्यों रोकी गईं?
कॉलेज ने असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के दौरान शॉर्टलिस्टिंग के नियमों का उल्लंघन किया था। यूनिवर्सिटी के नियम 40 और 20 उम्मीदवारों के शॉर्टलिस्टिंग का है, जबकि कॉलेज ने 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया था।
इस मामले की जांच कौन करेगा?
DU की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने प्रोफेसर इंदर मोहन कापाही की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई है, जिसमें अमन कुमार, डॉ. मोनिका अरोड़ा और डॉ. एल.एस. चौधरी सदस्य हैं।