Haryana: गुरुग्राम के DPS और उससे जुड़े अन्य स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए SWISS सर्टिफिकेशन अपनाया है। अब स्कूलों में बच्चों की भलाई और सेफ्टी सिर्फ बातचीत का हिस्सा नहीं रहेगी, बल्कि इसे नियमों के
Haryana: गुरुग्राम के DPS और उससे जुड़े अन्य स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए SWISS सर्टिफिकेशन अपनाया है। अब स्कूलों में बच्चों की भलाई और सेफ्टी सिर्फ बातचीत का हिस्सा नहीं रहेगी, बल्कि इसे नियमों के दायरे में लाया गया है। CBSE और UGC के नए निर्देशों के बाद अब स्कूलों के लिए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक कानूनी जिम्मेदारी बन गई है।
SWISS सर्टिफिकेशन से स्कूलों में क्या बदलेगा?
यह सर्टिफिकेशन ‘My Safe Spaces’ द्वारा बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा है। इसका मकसद स्कूलों को ऐसा सुरक्षित जोन बनाना है जहां किसी भी अनहोनी को होने से पहले रोका जा सके। अब स्कूलों में केवल काउंसलर ही नहीं होंगे, बल्कि फ्रंटलाइन शिक्षकों को भी ‘गेटकीपर ट्रेनिंग’ दी जाएगी ताकि वे बच्चों की समस्याओं को समय रहते पहचान सकें।
CBSE और UGC के नए नियम क्या कहते हैं?
शिक्षा बोर्ड और UGC ने अब साफ कर दिया है कि स्टूडेंट वेलबीइंग अब संस्थागत अनुपालन (Institutional Compliance) का हिस्सा है। इसका मतलब है कि:
- बच्चों की सुरक्षा अब बोर्ड लेवल की जांच के दायरे में होगी।
- स्कूलों को सुरक्षा मानकों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
- अभिभावकों की मांगों और उनकी शिकायतों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
सुरक्षा के लिए कौन-कौन सी संस्थाएं जुड़ी हैं?
| संस्था/फ्रेमवर्क |
भूमिका/काम |
| DPS Gurgaon और सिस्टर स्कूल |
SWISS सर्टिफिकेशन लागू करने वाले संस्थान |
| SWISS Certification |
सुरक्षा और वेलबीइंग का अंतरराष्ट्रीय मानक |
| My Safe Spaces |
SWISS फ्रेमवर्क बनाने वाली संस्था |
| CBSE और UGC |
नियामक संस्थाएं जिन्होंने निर्देश जारी किए |