Delhi में सिमट गई यमुना नदी, 200 साल में 68% घटी चौड़ाई; सरकार ने तय किया 2028 तक सफाई का लक्ष्य
Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी पिछले 200 सालों में बहुत ज्यादा सिमट गई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और IISER भोपाल के शोधकर्ताओं ने बताया है कि नदी की चौड़ाई में करीब 68% की कमी आई है। यह स्टडी पुराने नक्शों
Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी पिछले 200 सालों में बहुत ज्यादा सिमट गई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और IISER भोपाल के शोधकर्ताओं ने बताया है कि नदी की चौड़ाई में करीब 68% की कमी आई है। यह स्टडी पुराने नक्शों और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर की गई है, जिससे पता चलता है कि नदी का स्वरूप अब पहले जैसा नहीं रहा।
रिसर्च के मुताबिक, साल 1799 में यमुना की औसत चौड़ाई करीब 658 मीटर थी, जो अब घटकर सिर्फ 210 मीटर रह गई है। इतना ही नहीं, नदी में पानी के बहाव (डिस्चार्ज) में भी भारी गिरावट आई है। 18वीं सदी के अंत में जहां यह 30,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड था, वहीं अब यह घटकर करीब 3,900 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड रह गया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विमल सिंह ने बताया कि बैराज और नहरों के जरिए पानी को मोड़ दिया गया, जिससे नदी के निचले हिस्सों में पानी कम पहुंचता है। साथ ही, नदी के किनारों (floodplains) पर हुए कब्जों ने भी इसे संकरा कर दिया है।
नदी की हालत और खराब करने में गंदे पानी का बड़ा हाथ है। दिल्ली जल बोर्ड की नई जांच में सामने आया है कि दिल्ली के 22 बड़े नालों से निकलने वाला गंदा पानी पहले के अनुमान से 76% ज्यादा है। मई 2025 में यह 750.4 MGD था, जो मई 2026 तक बढ़कर 1,324.4 MGD हो गया। अकेले नजफगढ़ नाला ही 862 MGD गंदा पानी नदी में डाल रहा है, जो शहर के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कहीं ज्यादा है।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक बूंद भी बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी नहीं जाएगा। इसके लिए दिल्ली में लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम शुरू किया गया है। साथ ही, MCD और National Dairy Development Board (NDDB) के बीच एक समझौता हुआ है। इसके तहत दिल्ली में रोजाना निकलने वाले करीब 1,500 मीट्रिक टन गोबर से कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) बनाई जाएगी, ताकि नदी में प्रदूषण कम हो और साफ ऊर्जा मिल सके।