Delhi: यमुना बाजार घाट पर रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए मुश्किल समय शुरू हो गया है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने यहाँ के निवासियों को जगह खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिससे इलाके में मायूसी और तनाव का
Delhi: यमुना बाजार घाट पर रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए मुश्किल समय शुरू हो गया है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने यहाँ के निवासियों को जगह खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिससे इलाके में मायूसी और तनाव का माहौल है। करीब 1100 लोग इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
खाली करने का नोटिस और सरकारी नियम क्या हैं
DDMA ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 34 के तहत यह नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने 5 मई से 8 मई, 2026 के बीच नोटिस दिए, जिसमें 15 दिनों के भीतर जगह खाली करने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि यह जमीन DDA की है और ‘ओ-जोन’ यानी बाढ़ग्रस्त मैदान में आती है, जहाँ निर्माण करना मना है। अगर तय समय में जगह खाली नहीं हुई, तो बिना किसी और नोटिस के बुलडोजर से अवैध निर्माण हटा दिए जाएंगे।
सुरक्षा का हवाला और प्रभावित लोगों की मांग
अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया है क्योंकि मानसून में यमुना का जलस्तर बढ़ जाता है। 2023 और 2025 की बाढ़ का उदाहरण देते हुए बताया गया कि इस इलाके में बचाव कार्य में बहुत संसाधन खर्च हुए थे। वहीं, यहाँ रहने वाले पंडा, नाविक और फूल विक्रेता का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं। पंडा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सुनील शर्मा ने 2006 के एक कोर्ट स्टे का हवाला देते हुए पुनर्वास की मांग की है और अदालत जाने की बात कही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास के लोगों को बेदखल करना गलत है। इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी इस क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। फिलहाल 32 घाटों पर रहने वाले परिवारों में डर है कि उनके सिर से छत छिन जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यमुना बाजार घाट पर कितने लोग प्रभावित होंगे?
यहाँ के 32 घाटों पर रहने वाले लगभग 310 परिवार प्रभावित होंगे, जिनमें कुल मिलाकर करीब 1100 लोग शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से पंडा, नाविक, नाई और फूल विक्रेता रहते हैं।
सरकार ने जगह खाली करने का कारण क्या बताया है?
सरकार के अनुसार यह क्षेत्र यमुना का ‘ओ-जोन’ (बाढ़ग्रस्त मैदान) है और DDA की जमीन पर निर्माण प्रतिबंधित है। सुरक्षा कारणों और मानसून में बाढ़ के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।