Delhi: दिल्ली से 44 महिला जायरीन बिना किसी महरम (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा के लिए रवाना हुईं। यह कदम महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दिखाता है। दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां ने इस बदलाव का स्वा
Delhi: दिल्ली से 44 महिला जायरीन बिना किसी महरम (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा के लिए रवाना हुईं। यह कदम महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दिखाता है। दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां ने इस बदलाव का स्वागत किया और कहा कि अब अधिक महिलाएं स्वतंत्र रूप से इस पवित्र यात्रा को पूरा कर रही हैं।
बिना महरम हज यात्रा के क्या हैं नियम?
सऊदी अरब सरकार ने अब नियमों में बदलाव किया है, जिससे महिलाएं किसी भी उम्र में बिना महरम के उमराह या हज वीजा के लिए आवेदन कर सकती हैं। भारत सरकार की हज पॉलिसी के मुताबिक, 45 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं ‘लेडीज विदाउट महरम’ (LWM) कैटेगरी के तहत हज पर जा सकती हैं। हज कमेटी ऑफ इंडिया (HCoI) इन महिलाओं के रहने और सुरक्षा के लिए अलग से इंतजाम करती है।
हज 2026 की यात्रा और अब तक का आंकड़ा
हज 2026 का पहला जत्था 18 अप्रैल को दिल्ली से मक्का के लिए रवाना हुआ था, जिसमें कुल 371 यात्री शामिल थे। इसके बाद 21 अप्रैल को 44 महिलाओं का यह समूह रवाना हुआ। आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 में महरम की अनिवार्यता हटने के बाद से स्वतंत्र रूप से यात्रा करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है।
- साल 2023 में 4,314 महिलाएं बिना महरम हज पर गईं।
- 2018 से 2022 के बीच यह संख्या 3,400 थी।
- 65 साल से अधिक उम्र की LWM महिला यात्रियों के साथ 45 से 60 वर्ष की एक महिला साथी का होना जरूरी है।
इस्लाम के पांच मुख्य स्तंभ
इस्लाम धर्म में हर व्यक्ति के लिए पांच बुनियादी कर्तव्यों का पालन करना जरूरी माना गया है। हज इनमें से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। बाकी चार स्तंभों में शाहदा (ईमान), सलाह (नमाज), जकात (दान) और सौम (रमजान के रोजे) शामिल हैं।