Delhi: दिल्ली सरकार ने वजीराबाद से DND तक 19.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। यह प्रोजेक्ट यमुना किनारे बनेगा और इससे रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता न
Delhi: दिल्ली सरकार ने वजीराबाद से DND तक 19.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। यह प्रोजेक्ट यमुना किनारे बनेगा और इससे रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की है और बताया है कि इसके बन जाने से लोगों का सफर करीब 15 से 20 मिनट तक कम हो जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली की सड़कों को जाम मुक्त बनाकर सफर को सुगम बनाया जाए।
इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर में क्या होगा खास?
यह कॉरिडोर वजीराबाद से शुरू होकर DND तक जाएगा और इसे तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके करीब 6 किलोमीटर के हिस्से को डबल-डेकर बनाया जाएगा। ऊपरी हिस्से पर कार और बस जैसे तेज रफ्तार वाहन चलेंगे, जबकि नीचे के हिस्से का इस्तेमाल साइकिल ट्रैक या ई-रिक्शा के लिए किया जाएगा।
- पहला चरण: सूरघाट से ISBT तक का निर्माण होगा।
- दूसरा चरण: ISBT से सराय काले खां तक रास्ता बनेगा।
- तीसरा चरण: सराय काले खां से DND तक कॉरिडोर को जोड़ा जाएगा।
यह नया रास्ता दिल्ली के प्रमुख पुलों जैसे सिग्नेचर ब्रिज, युद्धिष्ठिर सेतु, विकास मार्ग और NH-24 को आपस में जोड़ेगा। इससे पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी और मध्य दिल्ली की कनेक्टिविटी बहुत बेहतर हो जाएगी।
किन प्रोजेक्ट्स पर कितना काम हुआ?
मुख्यमंत्री ने मेट्रो और अन्य सड़क परियोजनाओं की भी समीक्षा की है। दिल्ली में फिलहाल कई बड़े फ्लाईओवर और मेट्रो कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जिनकी स्थिति नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| प्रोजेक्ट का नाम |
काम की वर्तमान स्थिति |
| मेट्रो फेज 4 कॉरिडोर |
79.57 प्रतिशत पूरा |
| आजादपुर से त्रिपोलिया डबल-डेकर फ्लाईओवर |
73 प्रतिशत पूरा |
| यमुना विहार से भजनपुरा फ्लाईओवर |
85 प्रतिशत पूरा |
| त्रिपोलिया गेट से बर्फखाना फ्लाईओवर |
प्रस्ताव तैयार |
यह एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों और गंगा मिशन की आपत्तियों की वजह से अटका हुआ था। अब सरकार ने संशोधित योजना के साथ इस पर काम तेज कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। मेट्रो फेज चार के कई कॉरिडोर दिसंबर 2026 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।