Delhi के Vasant Kunj में गंदा पानी आने से लोग बीमार, DJB और DDA के बीच फंसी जनता
Delhi: वसंत कुंज के सेक्टर-1 और सेक्टर-2 के निवासी इन दिनों नलों से आने वाले गंदे और बदबूदार पानी से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पानी का रंग लाल-भूरा है और इसमें से सीवेज जैसी गंध आ रही है, जिससे इलाके में बीमारियां
Delhi: वसंत कुंज के सेक्टर-1 और सेक्टर-2 के निवासी इन दिनों नलों से आने वाले गंदे और बदबूदार पानी से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पानी का रंग लाल-भूरा है और इसमें से सीवेज जैसी गंध आ रही है, जिससे इलाके में बीमारियां फैल रही हैं। स्थिति इतनी खराब है कि लोग अब अपनी जरूरतों के लिए निजी टैंकरों और बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं।
इलाके के निवासी राजदेव केसरी ने बताया कि पिछले 13 महीनों से उन्हें गंदा पानी मिल रहा है। इस वजह से उन्हें अल्सर, दस्त और त्वचा की एलर्जी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। वहीं प्रतीक कुमार ने दावा किया कि उनके घर के पानी का TDS लेवल 800 तक पहुंच गया है, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा 500 मानी जाती है। उन्होंने इस प्रदूषित पानी को पेट की खराबी और बालों के झड़ने का मुख्य कारण बताया है।
इस समस्या को लेकर Delhi Jal Board (DJB) और Delhi Development Authority (DDA) के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान चल रही है। DDA ने आरोप लगाया है कि DJB ने सीवरेज और पानी की आपूर्ति का नियंत्रण नहीं संभाला है, जिससे स्थानीय जल निकायों में प्रदूषण फैल रहा है। वहीं, Delhi Pollution Control Committee (DPCC) ने स्मृति वन जैसे तालाबों में सीवेज मिलने पर DJB को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और जुर्माना भी लगाया है।
DJB के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली का पानी वितरण नेटवर्क काफी पुराना हो चुका है। लगभग 5,500 किलोमीटर पाइपलाइन 30 साल से ज्यादा पुरानी है, जिससे लीकेज और सीवेज के पानी के मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इलाके में एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था, लेकिन वह पिछले दो सालों से बंद पड़ा है। जल मंत्री परवेश साहिब सिंह ने पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
वर्तमान में DJB ने गुलमोहर पार्क में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जहां ऑनलाइन वाटर एनालाइजर के जरिए pH, TDS और क्लोरीन लेवल की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इमरजेंसी रिपेयर के बजाय नियमित टेस्टिंग और पाइपलाइनों के सुनियोजित बदलाव से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।