UP: दिल्ली और वाराणसी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों के बीच की दूरी सिमट जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कॉरिडोर के लिए समय सा
UP: दिल्ली और वाराणसी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों के बीच की दूरी सिमट जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कॉरिडोर के लिए समय सारणी साझा की है, जिससे आम यात्रियों को आने-जाने में बहुत आसानी होगी।
Bullet Train से कितना समय लगेगा?
इस हाईस्पीड कॉरिडोर के चालू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी तक का सफर काफी कम समय में पूरा होगा। रेल मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सफर का समय इस प्रकार रहेगा:
| कहाँ से कहाँ तक |
समय |
| Lucknow से Prayagraj |
48 मिनट |
| Delhi से Lucknow |
2 घंटे 12 मिनट |
| Delhi से Varanasi |
3 घंटे 50 मिनट |
| Lucknow से Ayodhya |
35 मिनट |
| Lucknow से Varanasi |
1 घंटा 21 मिनट |
| Delhi से Agra |
58 मिनट |
प्रोजेक्ट की लागत और रूट की जानकारी
यह पूरा कॉरिडोर लगभग 958 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें लखनऊ और अयोध्या को जोड़ने के लिए 123 किलोमीटर का एक अलग रास्ता भी बनाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1,71,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 300 किमी प्रति घंटा तक होगी।
इस रूट पर कुल 13 स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, दक्षिण कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, न्यू भदोही और वाराणसी शामिल हैं।
अभी प्रोजेक्ट की क्या स्थिति है?
केंद्र सरकार ने इसे सात बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में पहली प्राथमिकता दी है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में इसकी घोषणा की थी। फिलहाल NHSRCL द्वारा इसकी संशोधित DPR तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि 2026 के अंत या 2027 में जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होगा और 2030 के शुरुआती सालों तक यह ट्रेन पटरी पर दौड़ सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन में कुल कितने स्टेशन होंगे?
इस रूट पर कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, आगरा, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
यह ट्रेन कब तक शुरू हो सकती है?
वर्तमान में प्रोजेक्ट की संशोधित DPR तैयार की जा रही है और जमीन अधिग्रहण 2026-27 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद 2030 के शुरुआती वर्षों तक इसे शुरू किया जा सकता है।