Delhi: दिल्ली में विकास प्रोजेक्ट्स के नाम पर हटाए गए पेड़ों को बचाने की कोशिशें अब तक बहुत कामयाब नहीं रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों में से आधे भी जीवित नहीं बच पा रहे हैं। इस स्थिति को
Delhi: दिल्ली में विकास प्रोजेक्ट्स के नाम पर हटाए गए पेड़ों को बचाने की कोशिशें अब तक बहुत कामयाब नहीं रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों में से आधे भी जीवित नहीं बच पा रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली सरकार ने अब वैज्ञानिक तरीका अपनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पेड़ों का सर्वाइवल रेट बढ़ाने के लिए एक नया मास्टरप्लान तैयार किया है, जिसके तहत अब विदेशी मशीनों की मदद ली जाएगी और पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए एक्सपर्ट्स से रिसर्च करवाई जा रही है।
दिल्ली में ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों का क्या है हाल?
दिल्ली सरकार और वन विभाग के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि राजधानी में पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह लगाने का प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में लगाए गए पेड़ों में से केवल 35 से 42 प्रतिशत पेड़ ही जीवित बचे हैं।
- साल 2019 से 2022 के बीच 1,357 पेड़ों में से केवल 578 पेड़ बच पाए।
- साल 2022 में लगाए गए 8,500 पेड़ों में से केवल 41 फीसदी ही जिंदा रहे।
- अधिकारियों का मानना है कि पुरानी मशीनों से खुदाई के दौरान जड़ों को नुकसान पहुंचता है, जिससे पेड़ ‘ट्रांसप्लांट शॉक’ में चले जाते हैं और सूख जाते हैं।
सरकार के मास्टरप्लान में क्या-क्या शामिल है?
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार अब इस पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक बनाने जा रही है। इसके लिए उत्तराखंड के Forest Research Institute (FRI) को एक विशेष स्टडी करने का काम दिया गया है। संस्थान को 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी ताकि पॉलिसी में जरूरी बदलाव किए जा सकें। इसके अलावा गुजरात में सफल रही आधुनिक ‘ट्री ट्रांसप्लांटर’ मशीनों को विदेश से मंगवाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 70 लाख से ज्यादा नए पौधे लगाए जाएं और दिल्ली को और हरा-भरा बनाया जाए।
किन पेड़ों को बचाना है आसान और क्या हैं नए नियम?
रिसर्च में सामने आया है कि पीपल, बरगद, गूलर, पिलखन और अर्जुन जैसे पेड़ों के बचने की संभावना दूसरे पेड़ों के मुकाबले ज्यादा होती है। नए नियमों के तहत अब एजेंसियों के लिए कुछ शर्तें सख्त कर दी गई हैं ताकि पेड़ों की लापरवाही न हो।
| नियम/प्रक्रिया |
विवरण |
| सर्वाइवल टारगेट |
एजेंसी को कम से कम 80% पेड़ बचाने होंगे। |
| पेमेंट की शर्त |
पेड़ बचने पर ही एजेंसियों को पूरा पैसा मिलेगा, वरना जुर्माना लगेगा। |
| देखरेख का समय |
ट्रांसप्लांट के बाद 2 से 3 साल तक एजेंसी को ही देखभाल करनी होगी। |
| जियो-टैगिंग |
हर पेड़ की फोटो और लोकेशन पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। |
दिल्ली सरकार का 10 साल का एक लंबा प्लान भी है, जिसमें विलायती कीकर जैसे विदेशी पेड़ों को हटाकर उनकी जगह दिल्ली के देसी पेड़ लगाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से दिल्ली की हरियाली को असल मायने में बचाया जा सकेगा।