Uttarakhand: दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों ने 21 मई से 23 मई 2026 तक तीन दिनों का ‘चक्का जाम’ शुरू कर दिया है। इस हड़ताल की वजह से उत्तराखंड की सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। फल, सब्जी और फैक्ट्रियों के लिए
Uttarakhand: दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों ने 21 मई से 23 मई 2026 तक तीन दिनों का ‘चक्का जाम’ शुरू कर दिया है। इस हड़ताल की वजह से उत्तराखंड की सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। फल, सब्जी और फैक्ट्रियों के लिए आने वाले कच्चे माल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे आम जनता और कारोबारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर क्यों है?
यह विरोध All India Motor Transport Congress (AIMTC) के नेतृत्व में हो रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने Environment Compensation Cess (ECC) बढ़ा दिया है। अब हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह शुल्क 1,400 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये और भारी वाहनों के लिए 2,600 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रति ट्रिप कर दिया गया है। इसके अलावा, CAQM द्वारा 1 नवंबर 2026 से BS-IV और उससे पुराने वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव से भी वे नाराज हैं।
उत्तराखंड के किन इलाकों और सामानों पर पड़ेगा असर?
All Uttarakhand Motor Transport Association ने इस हड़ताल का समर्थन किया है, जिसके कारण उत्तराखंड से कोई भी ट्रक दिल्ली नहीं जाएगा। इसका सीधा असर सेलाकुई, ट्रांसपोर्टनगर, हरिद्वार सिडकुल, ऋषिकेश और सितारगंज जैसे औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ेगा।
- दैनिक जरूरतें: फल और सब्जियों की आपूर्ति में भारी कमी आएगी।
- इंडस्ट्री: प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स और दवा बनाने के जरूरी सामान (Medicine components) की सप्लाई रुक जाएगी।
- नुकसान: करीब 5,000 ट्रक सड़कों से हट गए हैं, जिससे फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित होगा और उद्यमियों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।
सरकार और अन्य संगठनों का क्या कहना है?
केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta से इस मुद्दे पर बात की है और जल्द समाधान की उम्मीद जताई है। हालांकि, सभी यूनियन इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। Delhi Taxi and Tourist Transport Association, दिल्ली ऑटो रिक्शा यूनियन और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन ने जनता की परेशानी को देखते हुए इस आंदोलन से दूरी बना ली है। वहीं, Ola और Uber के कुछ ड्राइवरों ने ट्रांसपोर्टरों की मांगों का समर्थन किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल कब तक चलेगी?
यह हड़ताल 21 मई 2026 से शुरू हुई है और 23 मई 2026 तक जारी रहेगी।
ECC शुल्क में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
हल्के वाहनों के लिए शुल्क 1,400 से बढ़कर 2,000 रुपये और भारी वाहनों के लिए 2,600 से बढ़कर 4,000 रुपये प्रति ट्रिप कर दिया गया है।