Delhi: राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक POCSO मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें पीड़ित बच्ची के पिता और चाचा भी शामिल थे, जिन पर अपराध की जानकारी पुलिस को न देने का आरोप था। स्पेशल जज (POCSO) सचिन गु
Delhi: राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक POCSO मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें पीड़ित बच्ची के पिता और चाचा भी शामिल थे, जिन पर अपराध की जानकारी पुलिस को न देने का आरोप था। स्पेशल जज (POCSO) सचिन गुप्ता ने 30 मई को यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने आरोपियों को बरी क्यों किया?
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पूरी तरह साबित नहीं कर पाया। इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़ित बच्ची ने सुनवाई के दौरान अपना पिछला बयान बदल दिया। उसने कोर्ट में कहा कि आरोपी चाचा (RN) ने उसे गलत तरीके से नहीं छुआ था। इसी वजह से कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
CCTV फुटेज को सबूत क्यों नहीं माना गया?
इस मामले की शुरुआत एक CCTV फुटेज से हुई थी, जिसे पेन ड्राइव के जरिए व्हाट्सएप पर साझा किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस फुटेज को कानूनी तौर पर मान्य सबूत नहीं माना। कानूनी प्रक्रिया के तहत सबूतों की कमी और गवाह के बयान बदलने के कारण यह फैसला आया।
क्या थे मुख्य आरोप और कानूनी धाराएं?
इस मामले में Hauz Khas पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। बच्ची के पिता (Ar) और चाचा (Aa) पर POCSO एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज था क्योंकि उन्होंने घटना की रिपोर्ट नहीं की थी। वहीं, मुख्य आरोपी (RN) पर BNS की धारा 137(2), 74, 75 और POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत छेड़छाड़ के आरोप लगे थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
तीस हजारी कोर्ट ने किन लोगों को बरी किया है?
कोर्ट ने छेड़छाड़ के आरोपी RN और पीड़ित बच्ची के पिता Ar और चाचा Aa को बरी किया है। पिता और चाचा पर अपराध की सूचना पुलिस को न देने का आरोप था।
इस फैसले का मुख्य कारण क्या था?
पीड़ित बच्ची ने कोर्ट में अपना बयान बदलते हुए कहा कि आरोपी ने उसे गलत तरीके से नहीं छुआ था। साथ ही, व्हाट्सएप पर भेजे गए CCTV फुटेज को कोर्ट ने सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया।