Delhi: 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी और पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए
Delhi: 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी और पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
सज्जन कुमार ने जमानत के लिए क्या दलीलें दी थीं?
सज्जन कुमार ने कोर्ट में अपनी खराब सेहत का हवाला दिया था। उन्होंने बताया कि उन्हें डायबिटीज जैसी कई बीमारियां हैं और उनकी उम्र 70 साल से ज्यादा हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने दलील दी कि वह पिछले 7 साल और 4 महीने से जेल में हैं और अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी से नहीं मिल पा रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन वजहों को जमानत देने के लिए काफी नहीं माना।
अदालत ने जमानत याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर निर्दोष लोगों की जान गई थी। कोर्ट के अनुसार, ऐसे संगीन अपराधों में राहत देना उचित नहीं है। अब सज्जन कुमार तब तक जेल में ही रहेंगे जब तक उनकी अपील पर अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
क्या है पूरा मामला और अब तक की कार्रवाई?
सज्जन कुमार को 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उन पर दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने का आरोप था।
| संस्था/कोर्ट |
भूमिका/फैसला |
| दिल्ली हाई कोर्ट |
2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई |
| राउज एवेन्यू कोर्ट |
22 जनवरी 2026 को जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में बरी किया |
| सुप्रीम कोर्ट |
24 अप्रैल 2026 को अंतरिम जमानत याचिका खारिज की |
| SIT |
2015 में हिंसा से संबंधित दो FIR दर्ज की थीं |