Delhi में छात्र प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने की निंदा, स्वतंत्र जांच की मांग
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने इस क
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन संगठनों ने पुलिस के बल प्रयोग की निंदा करते हुए पूरी घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
यह मामला 20 जुलाई, 2026 का है जब छात्र संसद की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्र NEET UG पेपर लीक जैसी अनियमितताओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे। छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की थी। आरोप है कि इस दौरान दिल्ली पुलिस ने छात्रों और वहां मौजूद वकीलों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
SCBA और SCAORA ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर इस तरह का बल प्रयोग लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। SCAORA ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। संगठनों ने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और घायलों को तुरंत इलाज मुहैया कराया जाए।
दूसरी तरफ, इस मामले में कानूनी मोर्चे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI ने वकीलों से कहा कि वे समय बर्बाद न करें और उन्हें घटना के वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इसी तरह की याचिका पर तुरंत सुनवाई से मना कर दिया था।
फिलहाल एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने और घायलों को मुआवजा देने की अपील की है। इस प्रदर्शन में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के सदस्य भी शामिल थे, जिसका गठन CJI की एक पिछली टिप्पणी के बाद हुआ था।