Delhi: मंगलवार रात दिल्ली में आए भीषण तूफान ने शहर में काफी तबाही मचाई। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर और रोहिणी जैसे इलाकों में कई पेड़ जड़ से उखड़ गए। बुधवार सुबह तक कई म
Delhi: मंगलवार रात दिल्ली में आए भीषण तूफान ने शहर में काफी तबाही मचाई। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर और रोहिणी जैसे इलाकों में कई पेड़ जड़ से उखड़ गए। बुधवार सुबह तक कई मुख्य सड़कों पर पेड़ गिरे होने की वजह से लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हुई और लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा।
पेड़ गिरने से क्या हुआ और प्रशासन ने क्या किया?
IMD के मुताबिक यह एक ड्राई थंडरस्टॉर्म था, जिसमें पूसा इलाके में हवा की रफ्तार 128 किमी प्रति घंटा तक दर्ज की गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पेड़ों के गिरने की 42 शिकायतें मिलीं, जबकि PWD कंट्रोल रूम में करीब 40 कॉल आए। पुलिस और PWD की टीमों ने पूरी रात काम करके सड़कों से मलबा और पेड़ हटाए ताकि यातायात बहाल हो सके।
पेड़ क्यों गिर रहे हैं और Experts ने क्या कहा?
विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ केवल तूफान की वजह से नहीं, बल्कि खराब मैनेजमेंट के कारण गिर रहे हैं। प्रोफेसर सी आर बाबू ने बताया कि पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट होने से उनकी जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिलती और मिट्टी में नमी कम हो जाती है। इसके अलावा दीमक का हमला और खोखले तने भी पेड़ों को कमजोर बना रहे हैं। ट्री एक्टिविस्ट भबरीन कंधारी ने कहा कि पेड़ रातों-रात कमजोर नहीं होते, बल्कि सही देखभाल न होने की वजह से गिरते हैं।
नियमों और डेडलाइन की क्या स्थिति है?
PWD ने आदेश दिया था कि 15 मई 2026 तक खतरनाक पेड़ों का सर्वे पूरा कर लिया जाए और 31 मई तक उन्हें हटा दिया जाए। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस काम में बहुत कम प्रगति हुई। साथ ही, दिल्ली हाई कोर्ट ने मई 2025 में जारी एक SOP पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने 2 जून 2026 को निर्देश दिया था कि रुके हुए प्रावधानों के तहत कोई कार्रवाई न की जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में तूफान के दौरान हवा की रफ्तार कितनी थी?
मंगलवार रात को आए तूफान में हवा की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक थी, जबकि पूसा इलाके में यह 128 किमी प्रति घंटा तक दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ गिरने का मुख्य कारण क्या है?
पेड़ों के चारों ओर कंक्रीटीकरण, जड़ों को जगह न मिलना, दीमक का हमला और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की कमी को मुख्य कारण बताया गया है।