Delhi: दिल्ली के स्कूलों में अब प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को और तेज किया जा रहा है। शिक्षा निदेशालय की Science Branch ने एक नया सर्कुलर जारी किया है जिसके तहत दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों में साल
Delhi: दिल्ली के स्कूलों में अब प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को और तेज किया जा रहा है। शिक्षा निदेशालय की Science Branch ने एक नया सर्कुलर जारी किया है जिसके तहत दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों में साल 2026-27 के पूरे सत्र में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसका मुख्य मकसद बच्चों और शिक्षकों को वायु प्रदूषण के खतरों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
स्कूलों में प्रदूषण रोकने के लिए क्या होंगे नए बदलाव?
शिक्षा निदेशालय के नए निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना होगा। इसके लिए स्कूलों में साल भर तरह-तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। दिल्ली के शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने पहले ही घोषणा की थी कि सरकारी स्कूलों के क्लासरूम में 10,000 Air Purifiers लगाए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि छात्र प्रदूषण के समय भी सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर सकें। प्रशासन का मानना है कि केवल कुछ दिनों के अभियानों से प्रदूषण कम नहीं होगा बल्कि इसके लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।
इलेक्ट्रिक बसों और EV पॉलिसी को लेकर क्या है तैयारी?
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर देना शुरू कर दिया है। 12 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट EV Policy के अनुसार अब स्कूलों को अपनी बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना जरूरी होगा। इसके लिए एक समय सीमा भी तय की गई है जिसे नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| समय सीमा |
इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य |
| अगले 2 सालों के भीतर |
कम से कम 10% बसें |
| तीसरे साल के अंत तक |
कम से कम 20% बसें |
| 31 मार्च 2030 तक |
30% बसें इलेक्ट्रिक करना अनिवार्य |
Transport Department की इस नई नीति से आने वाले समय में स्कूल बसों से होने वाले धुएं में काफी कमी आएगी। साथ ही स्कूलों को समय-समय पर छात्रों और मैनेजमेंट के लिए ट्रेनिंग कैंप भी लगाने होंगे ताकि वे वायु प्रदूषण के प्रति गंभीर रह सकें।