Delhi: केंद्र सरकार ने देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की तैयारी की है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को Delhi School of Economics में दो महत्व
Delhi: केंद्र सरकार ने देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की तैयारी की है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को Delhi School of Economics में दो महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का मुख्य मकसद युवाओं को समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में उच्च विकास वाले करियर के लिए तैयार करना है ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
इन समझौतों से युवाओं को क्या फायदा होगा?
इन MoUs के जरिए शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच की दूरी को कम किया जाएगा। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और रिसर्च के मौके मिलेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि युवा समुद्री क्षेत्र की नई तकनीक और नीतियों को समझें और इस तेजी से बढ़ते सेक्टर में अपनी जगह बनाएं।
- University of Delhi और Centre for Maritime Economy and Connectivity (CMEC) के बीच पहला समझौता हुआ, जो समुद्री शिक्षा और रिसर्च को मजबूत करेगा।
- RIS और Delhi School of Economics के बीच दूसरा समझौता हुआ, जो पब्लिक पॉलिसी रिसर्च और ट्रेनिंग प्रोग्राम पर केंद्रित होगा।
भारत के समुद्री क्षेत्र में कितनी है संभावनाएं?
मंत्री Sarbananda Sonowal ने बताया कि पिछले 12 सालों में भारत के समुद्री कार्यबल (seafaring workforce) में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में दुनिया के कुल समुद्री कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी लगभग 12% है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य रखा गया है।
| मुख्य बिंदु |
विवरण |
| वर्तमान वैश्विक हिस्सेदारी |
लगभग 12% |
| 2030 का लक्ष्य |
20% हिस्सेदारी |
| गाइडिंग सिद्धांत |
Reform, Perform, Transform |
| प्रमुख कार्यक्रम |
Sagarmala और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 |
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल रहा?
इस आयोजन की अध्यक्षता University of Delhi के कुलपति Prof Yogesh Singh ने की। साथ ही RIS के महानिदेशक Prof Sachin Kumar Sharma ने भी अपना संबोधन दिया। इस दौरान ‘Blue Economy: Its Imperatives for a Viksit Bharat’ विषय पर एक सेमिनार भी आयोजित किया गया, जिसमें बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और डिजिटल बदलावों पर चर्चा हुई।