Delhi: राजधानी के Sanjay Lake में पानी की सप्लाई शनिवार से दोबारा शुरू हो गई है। इससे पहले गुरुवार को झील में सैकड़ों मरी हुई मछलियाँ तैरती मिली थीं, जिससे पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई थी। भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर की
Delhi: राजधानी के Sanjay Lake में पानी की सप्लाई शनिवार से दोबारा शुरू हो गई है। इससे पहले गुरुवार को झील में सैकड़ों मरी हुई मछलियाँ तैरती मिली थीं, जिससे पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई थी। भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर की वजह से झील की हालत काफी खराब हो गई थी।
मछलियों की मौत क्यों हुई और पानी क्यों रुका था?
Delhi Jal Board (DJB) के मुताबिक, Kondli STP से झील तक Treated Water ले जाने वाली पाइपलाइन में लीकेज था। यह पाइपलाइन High-density polyethylene की बनी थी, जो Kondli STP के पास कचरा जलने की वजह से खराब हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि पानी की सप्लाई पिछले छह महीने से बाधित थी, क्योंकि पाइपलाइन में खराबी की सही जगह ढूंढने में समय लगा। इस दौरान गर्मी की वजह से पानी कम हो गया और ऑक्सीजन की कमी से मछलियाँ मरने लगीं।
DJB और DDA के बीच क्या है विवाद?
इस मामले में दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान दिखी है। DJB का कहना है कि Delhi Development Authority (DDA) ने वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए, जैसे कि टैंकरों या बोरवेल का इस्तेमाल करना। वहीं, DDA ने जवाब दिया कि झील का रखरखाव उनका काम है, लेकिन पानी की सप्लाई करना DJB की जिम्मेदारी है। DDA ने यह भी बताया कि उन्होंने झील की सफाई (desilting) कराई है और बारिश के पानी को झील में डालने के लिए कई सिस्टम लगाए हैं।
NGT ने पहले क्या कहा था?
National Green Tribunal (NGT) ने साल 2022 में ही इस झील की पानी की क्वालिटी पर चिंता जताई थी। NGT ने पाया था कि झील में Chemical Oxygen Demand (COD) की मात्रा बहुत ज्यादा है। इसका मतलब है कि पानी में प्रदूषण बहुत अधिक था, जिससे जलीय जीवों के लिए ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और उनका जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Sanjay Lake में मछलियाँ क्यों मरीं?
पाइपलाइन खराब होने से पानी की सप्लाई रुकी थी और भीषण गर्मी के कारण जलस्तर गिर गया। इससे पानी में घुली ऑक्सीजन कम हो गई, जिससे सैकड़ों मछलियाँ मर गईं।
पानी की सप्लाई क्यों बंद थी?
Kondli STP से आने वाली मुख्य पाइपलाइन कचरा जलने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस लीकेज को ठीक करने में समय लगा, जिससे सप्लाई लगभग छह महीने तक बाधित रही।