Delhi: दिल्ली के लोगों को रिंग रोड पर लगने वाले लंबे जाम से जल्द राहत मिल सकती है। PWD अब महात्मा गांधी रिंग रोड को डीकंजेशन करने के लिए 80 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी में है। इस पूरे प्रोजेक्ट को छह अ
Delhi: दिल्ली के लोगों को रिंग रोड पर लगने वाले लंबे जाम से जल्द राहत मिल सकती है। PWD अब महात्मा गांधी रिंग रोड को डीकंजेशन करने के लिए 80 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी में है। इस पूरे प्रोजेक्ट को छह अलग-अलग फेज में पूरा किया जाएगा ताकि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े।
प्रोजेक्ट की लागत और काम की स्थिति क्या है?
इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालिया अपडेट के मुताबिक, कंसल्टेंट कंपनी AECOM India Pvt Ltd ने प्रोजेक्ट की Detailed Project Report (DPR) तैयार कर सरकार को सौंप दी है। PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने बताया कि DPR की जांच चल रही है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। यह कॉरिडोर मौजूदा 55 किमी लंबे रिंग रोड के ऊपर बनाया जाएगा।
किन इलाकों को मिलेगा फायदा और क्या है प्लान?
प्रोजेक्ट को छह चरणों में बांटा गया है, जिसमें शुरुआती फेज में आजादपुर (मुकरबा चौक) से DND फ्लाईवे तक करीब 20-25 किमी का काम होगा। मुख्य हिस्सों की जानकारी नीचे दी गई है:
| फेज/स्ट्रेच |
दूरी (लगभग) |
| आजादपुर फ्लाईओवर से हनुमान मंदिर (ISBT) |
9.5 किमी |
| चंदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला |
2.5 किमी |
| हनुमान मंदिर (ISBT) से DND फ्लाईओवर |
11.5 किमी |
| DND फ्लाईओवर से मोती बाग मेट्रो स्टेशन |
10.5 किमी |
| मोती बाग से राजौरी गार्डन |
10 किमी |
| राजौरी गार्डन से पैसिफिक मॉल, पीतमपुरा और आजादपुर |
13.5 किमी |
आम जनता के लिए यह प्रोजेक्ट क्यों जरूरी है?
रिंग रोड दिल्ली की लाइफलाइन है और यहाँ ट्रैफिक की समस्या बहुत ज्यादा रहती है। इस एलिवेटेड रोड से गाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी और बिना ज्यादा जमीन अधिग्रहण किए जाम कम होगा। सरकार का लक्ष्य इसे मेट्रो कॉरिडोर के साथ जोड़ना और ASI के नियमों का पालन करना है ताकि स्मारकों को नुकसान न पहुंचे। मजनू का टीला से सलीमगढ़ किले तक 5 किमी के हिस्से के लिए मंजूरी मिल चुकी है और पर्यावरण क्लियरेंस के बाद टेंडर निकाले जाएंगे।