Delhi में प्रदर्शनकारियों पर Pellet Gun चलाने का आरोप, RAF ने माना ‘जरूरत से ज्यादा बल’ का इस्तेमाल
Delhi: राजधानी दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर Pellet Gun चलाने के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 20 जुलाई 2026 को Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा आयोजित इस मार्च में करीब 80 लोग घायल हु
Delhi: राजधानी दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर Pellet Gun चलाने के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 20 जुलाई 2026 को Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा आयोजित इस मार्च में करीब 80 लोग घायल हुए थे। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गलत बताया है, लेकिन अब Rapid Action Force (RAF) की आंतरिक जांच में ‘excessive force’ यानी जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की बात सामने आई है।
इस घटना में 19 साल के साहिल लोचाब और 25 साल के शेख इरशाद मंसूरी जैसे युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। साहिल की आंख में Pellet लगने से उसकी रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है और उसकी सर्जरी भी कराई गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे का जिक्र हुआ, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने वीडियो देखने में असमर्थता जताई।
भारत में Pellet Gun के इस्तेमाल को लेकर कोई एक अलग कानून नहीं है। इसे Arms Act 1959 और BNSS 2023 के नियमों के तहत चलाया जाता है। नियम के मुताबिक, भीड़ को हटाने के लिए पहले चेतावनी दी जाती है, फिर आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल होता है, और फायरिंग सबसे आखिरी रास्ता होना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना हथियार वाली भीड़ पर Pellet Gun चलाना गैरकानूनी है क्योंकि ये गोलियां शरीर के अंदर घुसकर स्थायी अपंगता पैदा कर सकती हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार ने CRPF को निर्देश दिया है कि जंतर-मंतर जैसे विरोध प्रदर्शन वाले इलाकों में ड्यूटी के दौरान Pellet Gun का इस्तेमाल न किया जाए। CRPF अब अपने जवानों के व्यवहार और मीडिया रिपोर्ट्स की जांच कर रहा है ताकि सच सामने आ सके।