Delhi: दिल्ली पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों के असर को लेकर एक बड़ा दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता 2023 की वजह से अब मामलों में तेजी आई है। एक हालिया उदाहरण में सिर्फ 3 दिन में जांच पूरी की गई, 4 दिन मे
Delhi: दिल्ली पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों के असर को लेकर एक बड़ा दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता 2023 की वजह से अब मामलों में तेजी आई है। एक हालिया उदाहरण में सिर्फ 3 दिन में जांच पूरी की गई, 4 दिन में चार्जशीट दाखिल हुई और 14 दिन के भीतर न्याय मिल गया।
नए कानूनों से आम जनता को क्या फायदा होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ये कानून ‘नागरिक प्रथम’ के सिद्धांत पर आधारित हैं। इनका मकसद पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दे। गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया कि इन कानूनों को सरल और प्रभावी बनाया गया है ताकि आम आदमी को कानूनी प्रक्रियाओं में कम परेशानी हो।
जांच और चार्जशीट के लिए क्या हैं सरकारी नियम
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अब समय सीमा तय की गई है। सामान्य तौर पर आरोपी की न्यायिक हिरासत के बाद चार्जशीट दाखिल करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। वहीं, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। पीड़ित और आरोपी दोनों को पुलिस रिपोर्ट की कॉपी 14 दिनों के भीतर मिल जाएगी।
Delhi Police के Outer North जिले ने बनाया रिकॉर्ड
दिल्ली पुलिस के Outer North जिले ने देश में पहली बार BNSS 2023 के तहत ‘इन-एबसेंटिया’ (अनुपस्थिति में) चार्ज फ्रेम किए हैं। DCP बाहरी उत्तर, हरेश्वर वी. स्वामी ने बताया कि अब आरोपी अगर फरार भी रहता है, तो भी कानूनी कार्रवाई नहीं रुकेगी। गृह मंत्रालय ने इस कदम को नए कानून के कार्यान्वयन के लिए एक मॉडल माना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नए आपराधिक कानून कब से लागू हुए हैं
भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में प्रभावी हुए हैं।
चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा क्या है
BNSS के अनुसार, आरोपी की न्यायिक हिरासत से 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य है, वरना आरोपी वैधानिक जमानत का हकदार हो सकता है।