दिल्ली : दिल्ली पुलिस अब और भी हाईटेक होने जा रही है। शहर की सुरक्षा में तैनात सभी 857 पीसीआर (PCR) वैन को जल्द ही डैशकैम से लैस किया जाएगा। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे भी दिए जाएंगे। इस
दिल्ली : दिल्ली पुलिस अब और भी हाईटेक होने जा रही है। शहर की सुरक्षा में तैनात सभी 857 पीसीआर (PCR) वैन को जल्द ही डैशकैम से लैस किया जाएगा। इसके साथ ही ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे भी दिए जाएंगे। इस कदम का मुख्य मकसद अपराध वाली जगह पर सबूतों को सुरक्षित रखना और पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता लाना है। पीसीआर कर्मी किसी भी घटना स्थल पर सबसे पहले पहुँचते हैं, ऐसे में कैमरों की मदद से शुरुआती डिजिटल साक्ष्य जुटाना आसान हो जाएगा।
कैसे लागू होगी यह योजना और क्या है इसकी तैयारी?
दिल्ली पुलिस ने इस योजना को चरणों में लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में 300 डैशकैम और 300 बॉडी कैमरों की खरीदारी की जाएगी। इसके लिए दिल्ली पुलिस के प्रावधान और लॉजिस्टिक्स डिवीजन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
- दिल्ली पुलिस के बेड़े में मौजूद सभी 857 पीसीआर वैन को कवर किया जाएगा।
- पहले चरण में ट्रायल के तौर पर 300 कैमरे लगाए जा रहे हैं।
- बाकी 557 वैन और उनके प्रभारियों को अगले चरणों में उपकरण दिए जाएंगे।
- जल्द ही इसके लिए आधिकारिक टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
- नवंबर 2025 में शामिल की गई 55 नई वैन और पुरानी मोटरसाइकिलों को भी इसमें जोड़ा गया है।
जनता और पुलिस को इस नई तकनीक से क्या फायदा होगा?
यह पूरी पहल नए आपराधिक कानूनों, खासकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नियमों के तहत की जा रही है। नए कानून के मुताबिक, जिन अपराधों में 7 साल या उससे ज्यादा की सजा है, वहां पुलिस के लिए वीडियोग्राफी करना अब अनिवार्य है। पुलिस का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी।
| प्रमुख लाभ |
विवरण |
| पारदर्शिता |
पुलिस और जनता के बीच बातचीत रिकॉर्ड होगी, जिससे विवाद कम होंगे। |
| झूठे आरोप |
पुलिसकर्मियों पर लगने वाले गलत आरोपों से उनका बचाव होगा। |
| डिजिटल साक्ष्य |
घटना स्थल की रियल टाइम रिकॉर्डिंग कोर्ट में मजबूत सबूत बनेगी। |
| जवाबदेही |
पुलिस कर्मियों के व्यवहार और काम करने के तरीके पर नजर रहेगी। |
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ये कैमरे पुलिस की प्रतिक्रिया के शुरुआती चरण में ही महत्वपूर्ण सबूतों को पकड़ने में मदद करेंगे। इससे जांच में होने वाली देरी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, 8 अप्रैल 2026 को इस योजना के अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी है।