Delhi: दिल्ली पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टरों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा अभियान “Operation Gang Bust 2.0” चलाया है। इस 48 घंटे के महाभियान के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और
Delhi: दिल्ली पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टरों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा अभियान “Operation Gang Bust 2.0” चलाया है। इस 48 घंटे के महाभियान के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई, जिसमें कुल 482 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच क्राइम ब्रांच ने सरकारी अस्पतालों की दवाइयों का रैपर बदलकर उन्हें खुले बाजार में बेचने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का भी पर्दाफाश किया है।
ऑपरेशन Gang Bust 2.0 और पुलिस की बड़ी बरामदगी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अलग-अलग जिलों की टीमों ने 5 मई की सुबह 8 बजे से 7 मई की सुबह 8 बजे तक यह सघन अभियान चलाया। पुलिस ने करीब 1,014 ठिकानों पर छापेमारी की और शहजाद भट्टी नेटवर्क के 9 सदस्यों समेत कुल 482 लोगों को पकड़ा। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि ये अपराधी दिल्ली के ऐतिहासिक मंदिर और हरियाणा के हिसार में सैन्य कैंप जैसे संवेदनशील स्थानों पर हमले की साजिश रच रहे थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान 141 पिस्तौल, 212 कारतूस, 19 किलो नशीले पदार्थ और लगभग 19 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
सरकारी दवाइयों का काला कारोबार और 6 करोड़ की जब्ती
क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से दवाइयां इकट्ठा कर उनका लेबल बदल देता था। ये लोग “Government Supply – Not for Sale” लिखे लेबल हटाकर उन पर नामी कंपनियों के फर्जी लेबल लगाते थे। पुलिस ने मास्टरमाइंड मनोज कुमार जैन सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी में इंसुलिन, रेबीज वैक्सीन और हेपेटाइटिस-बी जैसी जीवनरक्षक दवाइयां मिली हैं, जिनकी कीमत करीब 6 करोड़ रुपये आंकी गई है। ये दवाइयां दिल्ली-NCR के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी और मणिपुर जैसे राज्यों में भी सप्लाई की जा रही थीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Operation Gang Bust 2.0 क्या है?
यह दिल्ली पुलिस द्वारा संगठित अपराध के खिलाफ चलाया गया 48 घंटे का एक बड़ा अभियान है, जिसमें 482 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में हथियार व नशीले पदार्थ बरामद हुए।
दवाई गिरोह किस तरह का फर्जीवाड़ा कर रहा था?
यह गिरोह सरकारी अस्पतालों की सप्लाई वाली दवाइयों के मूल लेबल हटाकर उन पर फर्जी ब्रांडेड लेबल लगाता था और उन्हें दिल्ली-NCR सहित पूर्वोत्तर राज्यों में महंगे दामों पर बेचता था।
पुलिस ने छापेमारी में कितने हथियार बरामद किए हैं?
पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 1,014 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें 141 पिस्तौल, 212 कारतूस और 79 चाकू बरामद किए गए हैं।