Delhi: दिल्ली पुलिस की वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम ने एक महीने तक चले ‘ऑपरेशन साइबर क्लीन’ के जरिए एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क को पकड़ा है। इस गिरोह ने अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाकर
Delhi: दिल्ली पुलिस की वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम ने एक महीने तक चले ‘ऑपरेशन साइबर क्लीन’ के जरिए एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क को पकड़ा है। इस गिरोह ने अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाकर करीब 40 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने इस कार्रवाई में 35 अपराधियों को गिरफ्तार किया है और 54 अन्य लोगों को चेतावनी देकर जांच के दायरे में लिया है।
कैसे करते थे ठगी और कौन हुए गिरफ्तार
यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से लोगों को फंसाता था। ये लोग डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं और ऑनलाइन डेटिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा ये APK फाइल भेजकर और टेलीग्राम बॉट के जरिए भी लोगों के पैसे लूटते थे। पुलिस ने बिट्टू चौधरी, लविश चुघ, ऋषि, अरुण सिंह, आशीष, दीपक भट्ट, अशोक कुमार, सूरज कुमार, दीपू कुमार और विवेक कुमार समेत 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा नेटवर्क दिल्ली के साथ-साथ झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात तक फैला हुआ था।
कितने पैसे बरामद हुए और क्या सामान मिला
पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल सामान और कैश बरामद किया है। बैंकिंग तालमेल और लियन मार्किंग के जरिए 1.11 करोड़ रुपये सुरक्षित किए गए हैं, जबकि अदालत के आदेश से 51.95 लाख रुपये पीड़ितों को वापस लौटा दिए गए हैं।
| बरामद सामान |
संख्या/राशि |
| नकद राशि |
14.18 लाख रुपये |
| सिम कार्ड |
359 |
| ATM कार्ड |
218 |
| मोबाइल फोन |
88 |
| चेक बुक और पासबुक |
78 |
| अन्य |
लैपटॉप और एक कार |
ठगी के मुख्य तरीके क्या थे
पुलिस जांच में सामने आया कि ये ठग ‘DL Office’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए OTP शेयरिंग का काम करते थे। ये लोग फर्जी वीआईपी सदस्यता और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग भी कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी निगरानी और डिजिटल इंटेलिजेंस की मदद से इस गिरोह को पकड़ा गया है। अभी डिजिटल उपकरणों की जांच चल रही है, जिससे आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑपरेशन साइबर क्लीन क्या है?
यह दिल्ली पुलिस की वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम द्वारा चलाया गया एक महीने का विशेष अभियान था, जिसका मकसद अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को पकड़ना था। इसमें 40 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ।
साइबर ठग लोगों को कैसे फंसाते थे?
ठग डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश स्कीम, ऑनलाइन डेटिंग फ्रॉड और APK फाइल के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। वे व्हाट्सएप पर ‘DL Office’ ग्रुप बनाकर OTP शेयरिंग का काम भी करते थे।