Delhi में CJP का आंदोलन खत्म, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस ले सकती है पुलिस
Delhi: जंतर मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) का 36 दिनों तक चला आंदोलन अब खत्म हो गया है। इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों पर दर्ज की गई FIR को वापस लिया जा सकता है। दिल्ली पुलिस अब इस मामले में सरकार से आधिकारिक आदेश का
Delhi: जंतर मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) का 36 दिनों तक चला आंदोलन अब खत्म हो गया है। इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों पर दर्ज की गई FIR को वापस लिया जा सकता है। दिल्ली पुलिस अब इस मामले में सरकार से आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रही है।
न्यू दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने 25 जुलाई 2026 को बताया कि आंदोलन खत्म होने के बाद FIR वापस होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने, बिना बैच वाले सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों और महिलाओं के साथ बदसलूकी के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
केंद्रीय मंत्री J.P. Nadda ने CJP के साथ बातचीत के बाद भरोसा दिलाया था कि दिल्ली पुलिस और BJP शासित राज्यों में आंदोलन से जुड़ी FIR वापस ली जाएंगी। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि FIR एक आधिकारिक रिकॉर्ड होता है, जिसे सीधे तौर पर ‘डिलीट’ नहीं किया जा सकता। इसके लिए या तो चार्जशीट दाखिल करनी होती है, जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट देनी होती है या सरकार को मुकदमा वापस लेने का फैसला करना होता है। जैसे ही सरकार का लिखित आदेश आएगा, आगे की जांच रोक दी जाएगी। CJP के प्रवक्ता को उम्मीद है कि मंगलवार तक उन्हें इसकी लिखित पुष्टि मिल जाएगी।
बता दें कि 20 से 23 जुलाई के बीच हुई हिंसा और हंगामे को लेकर दिल्ली पुलिस ने कम से कम 15 FIR दर्ज की थीं। इनमें हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने, सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल थीं। इसके अलावा जेबकतरी के 22 अलग मामले भी दर्ज हुए थे।
पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के जरिए करीब 2,500 लोगों की पहचान की है, जिनमें 2,000 से ज्यादा लोग ऐसे थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में 129 सुरक्षाकर्मी और 60 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों के पासपोर्ट रद्द करने की खबरों को दिल्ली पुलिस ने गलत बताया है और साफ किया है कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालात को देखते हुए पुलिस ने अपने जवानों की सभी नियमित छुट्टियां भी रद्द कर दी थीं।