Delhi: सीबीआई ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को 3 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला 5,000 करोड़ रुपये के नकली दवा घोटाले की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने
Delhi: सीबीआई ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को 3 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला 5,000 करोड़ रुपये के नकली दवा घोटाले की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने सीबीआई की जांच में मदद दिलाने और आरोपी को राहत दिलाने के बदले मोटी रकम की मांग की थी।
कौन है गिरफ्तार इंस्पेक्टर और क्या हैं आरोप?
गिरफ्तार अधिकारी की पहचान प्रदीप सिंह के रूप में हुई है, जो दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के साउथ रेंज में तैनात थे। सीबीआई के मुताबिक, प्रदीप सिंह ने एक साजिश के तहत सीबीआई के जांच अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर अपना प्रभाव दिखाने का दावा किया था। उन्होंने इस काम के लिए 3 करोड़ रुपये की मांग की थी और पहली किस्त के तौर पर 1 करोड़ रुपये ले लिए थे।
कौन था इस घोटाले का मुख्य आरोपी?
इस पूरे मामले में पुडुचेरी के एन राजा (alias वल्लियप्पन alias राजशेखर) मुख्य आरोपी है। राजा पर 5,000 करोड़ रुपये के नकली और घटिया दवाओं के रैकेट चलाने का आरोप है। वह सीबीआई के मामलों में राहत चाहता था, जिसके लिए उसने बिचौलिये राजकुमार (alias मदनराज) की मदद ली। सीबीआई अब दिल्ली में तैनात एक अन्य वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसने कथित तौर पर राजा से 3 करोड़ रुपये मांगे थे।
नकली दवाओं का यह घोटाला कब सामने आया?
यह बड़ा फर्जीवाड़ा पिछले साल पुडुचेरी पुलिस और CB-CID ने पकड़ा था। जांच के दौरान भारी मात्रा में नकली दवाएं और उन्हें बनाने का कच्चा माल जब्त किया गया था। इसी मामले की गहराई से जांच सीबीआई कर रही थी, जिसमें अब दिल्ली पुलिस के अधिकारी के शामिल होने की बात सामने आई है। सीबीआई ने 8 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की और 10 जून को गिरफ्तारी की गई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को क्यों गिरफ्तार किया गया?
प्रदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 5,000 करोड़ के नकली दवा घोटाले के आरोपी एन राजा को सीबीआई जांच में राहत दिलाने के बदले 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी और 1 करोड़ रुपये ले लिए।
नकली दवाओं का यह घोटाला कितना बड़ा है?
यह घोटाला लगभग 5,000 करोड़ रुपये का है, जिसे पुडुचेरी से संचालित किया जा रहा था। इसका खुलासा पिछले साल पुडुचेरी पुलिस और CB-CID ने किया था।