Delhi: संसद भवन की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने अदालत में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जो करीब 13,000 पन्नों की है। इसमें आरोपियों पर आतंकी
Delhi: संसद भवन की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने अदालत में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जो करीब 13,000 पन्नों की है। इसमें आरोपियों पर आतंकी गतिविधियों और साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस चार्जशीट में क्या गंभीर आरोप लगे हैं?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA की धाराओं का इस्तेमाल किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने आतंकी कृत्य किए, आपराधिक साजिश रची और दंगों को भड़काने की कोशिश की। साथ ही, सबूतों को मिटाने और सरकारी कर्मचारियों को उनके काम से रोकने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी घटना का मकसद लोगों के मन में डर पैदा करना था।
कोर्ट की अगली सुनवाई कब और क्या होगा?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) अमित बंसल ने इस चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ले लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को दोपहर 2 बजे होगी। इस दिन आरोपी नीलम रनोलिया और अमोल धनराज के वकीलों को चार्जशीट की हार्ड कॉपी दी जाएगी और दस्तावेजों की जांच होगी। फिलहाल कोर्ट में आरोप तय करने (framing of charges) पर बहस चल रही है।
अब तक के मामले की मुख्य बातें
- 13 दिसंबर 2023: संसद भवन में सुरक्षा breach की घटना हुई थी।
- 7 जून 2024: पुलिस ने पहली चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें 6 आरोपी थे।
- 2 जुलाई 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने नीलम आजाद और महेश कुमावत को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी।
- 3 फरवरी 2026: दिल्ली पुलिस ने अन्य आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए उन्हें इस साजिश का मुख्य खिलाड़ी बताया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
संसद सुरक्षा मामले में दिल्ली पुलिस ने कौन सी धाराएं लगाई हैं?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत आतंकी कृत्य, आपराधिक साजिश और दंगों को भड़काने जैसी गंभीर धाराएं लगाई हैं।
इस मामले में अब तक किन आरोपियों को जमानत मिली है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 जुलाई 2025 को नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दी थी, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया पर बात न करने और दिल्ली में रहने की शर्त दी गई थी।