Delhi में विरोध प्रदर्शन के दौरान Facial Recognition के इस्तेमाल पर विवाद, SC में याचिका दायर

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा Facial Recognition Technology (FRT) और AI का इस्तेमाल किए जाने पर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद A A Rahim ने सुप्र

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा Facial Recognition Technology (FRT) और AI का इस्तेमाल किए जाने पर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद A A Rahim ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील सुभाष चंद्रन के.आर. के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की निगरानी से लोगों की प्राइवेसी, बोलने की आजादी और शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी पूर्व JNUSU अध्यक्ष आयशा घोष ने इसी तरह की निगरानी के खिलाफ याचिका दायर की थी।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि विरोध प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी करना कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एक सामान्य तरीका है और यह सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वे ‘इक्षणा’ (Ikshana) वाहनों, ‘अजना लेंस’ (AjnaLens) स्मार्ट चश्मों और NCRB के ‘अभिज्ञान’ ऐप का इस्तेमाल केवल संदिग्ध अपराधियों और भगोड़ों की पहचान करने के लिए करते हैं, न कि आम प्रदर्शनकारियों के लिए।

पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि जंतर मंतर पर इस तकनीक की मदद से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,800 से ज्यादा लोगों की पहचान की गई, जिससे 20 जुलाई की हिंसा से जुड़ी जांच में मदद मिली। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भारत में इस तकनीक के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कानूनी ढांचा नहीं है और यह बिना किसी कानूनी आधार के किया जा रहा है।