Delhi के जंतर मंतर पर पुलिस ने तैनात किए AI कैमरे, चेहरे पहचानने वाली तकनीक से प्रदर्शनकारियों में डर

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के लिए अब पुलिस की नजरें और भी पैनी हो गई हैं। दिल्ली पुलिस ने यहां AI तकनीक वाले खास कैमरों और सर्विलांस वैन की तैनाती की है, जो भीड़ में मौजूद लोगों के

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के लिए अब पुलिस की नजरें और भी पैनी हो गई हैं। दिल्ली पुलिस ने यहां AI तकनीक वाले खास कैमरों और सर्विलांस वैन की तैनाती की है, जो भीड़ में मौजूद लोगों के चेहरे पहचान सकते हैं। इस कदम के बाद प्रदर्शनकारियों के बीच अपनी प्राइवेसी और पहचान को लेकर काफी चिंता देखी जा रही है।

पुलिस ने यहां DP-Dristhi और Ikshana नाम की सर्विलांस वैन के साथ-साथ एक मोबाइल कमांड और कंट्रोल व्हीकल तैनात किया है। ये सिस्टम AI की मदद से लाइव CCTV फुटेज को स्कैन करते हैं और चेहरों की पहचान करते हैं। फिलहाल जंतर मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के लोग NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस तकनीक के इस्तेमाल से घबराकर कई प्रदर्शनकारी अपना चेहरा ढककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, पूर्व JNUSU अध्यक्ष ऐशे घोष ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक PIL दाखिल की है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की लगातार निगरानी लोगों की प्राइवेसी, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन कैमरों का मकसद आम प्रदर्शनकारियों को परेशान करना नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ उन अपराधियों, भगोड़ों और आदतन अपराधियों को पहचानने के लिए किया जा रहा है जो भीड़ का फायदा उठाकर वहां पहुंच सकते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर वीडियोग्राफी केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए की जा रही है।

भारत में फिलहाल सार्वजनिक जगहों पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक (FRS) को कंट्रोल करने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। हालांकि, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 एक सामान्य ढांचा देता है, लेकिन वह बायोमेट्रिक सर्विलांस को खास तौर पर रेगुलेट नहीं करता। दिल्ली पुलिस ने पहले बताया था कि जब किसी चेहरे का मिलान 80% तक सही होता है, तभी उसे पॉजिटिव मैच माना जाता है।