Delhi: दिल्ली पुलिस अब शहर की सुरक्षा को और पुख्ता करने जा रही है। पुलिस कमिश्नर Satish Golchha ने आदेश दिया है कि शहर के हर पुलिस स्टेशन में एक स्पेशल खुफिया काउंटर टेरर यूनिट (CTU) बनाई जाए। यह फैसला ‘Operation S
Delhi: दिल्ली पुलिस अब शहर की सुरक्षा को और पुख्ता करने जा रही है। पुलिस कमिश्नर Satish Golchha ने आदेश दिया है कि शहर के हर पुलिस स्टेशन में एक स्पेशल खुफिया काउंटर टेरर यूनिट (CTU) बनाई जाए। यह फैसला ‘Operation Sindoor’ के बाद लिया गया है ताकि आतंकी साजिशों को जमीनी स्तर पर ही रोका जा सके।
इन खुफिया यूनिट्स का काम क्या होगा और कैसे काम करेंगी
ये यूनिट्स Anti-Terrorism Squad (ATS) की मदद करेंगी और एक लोकल इंटेलिजेंस नेटवर्क की तरह काम करेंगी। हर पुलिस स्टेशन के SHO एक अलग और गुप्त जगह तय करेंगे जहां ये टीम बैठेगी। इस टीम में एक सीनियर अधिकारी और दो से तीन अन्य पुलिसकर्मी होंगे। सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए इन अधिकारियों के पास कोई नेमप्लेट या वर्दी का खास निशान नहीं होगा।
आतंकवादी नेटवर्क के किन नए तरीकों पर है नजर
पुलिस को पता चला है कि आजकल आतंकी संगठन सोशल मीडिया और सुरक्षित इंटरनेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे 18 से 30 साल के युवाओं का ब्रेनवाश कर रहे हैं और उन्हें घर बैठे हथियार बनाना सिखा रहे हैं। इसके अलावा, कुछ धार्मिक चैरिटी संस्थाओं की आड़ में फंडिंग जुटाई जा रही है। आतंकी नेटवर्क विदेशी पर्यटकों और इजरायली धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर पड़े।
Border Security Force की भूमिका और गृह मंत्री का बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने BSF की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि ‘Operation Sindoor’ के दौरान BSF ने सीमा की सुरक्षा मजबूती से की और सीमावर्ती इलाकों के लोगों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने राज्य पुलिस और प्रशासन से तालमेल बिठाकर सुरक्षा घेरे को और मजबूत करने की बात कही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली के पुलिस स्टेशनों में CTU क्यों तैनात की जा रही हैं
Operation Sindoor के बाद यह फैसला लिया गया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने वाले और विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहने वाले आतंकी नेटवर्क को लोकल लेवल पर पकड़ा जा सके।
इन खुफिया यूनिट्स में कितने सदस्य होंगे
प्रत्येक स्टेशन की CTU टीम में एक ऊपरी अधीनस्थ (upper subordinate) और दो से तीन निचले अधीनस्थ (lower subordinates) शामिल होंगे जो बिना किसी पहचान चिन्ह के काम करेंगे।