Delhi: दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क में ‘म्यूल’ बैंक खातों और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा जा रहा था। पुलिस ने जांच के दौरान सिर्फ आठ दिनों में 16
Delhi: दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क में ‘म्यूल’ बैंक खातों और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा जा रहा था। पुलिस ने जांच के दौरान सिर्फ आठ दिनों में 16 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन का पता लगाया है। इस मामले में पुलिस ने दो फर्जी निदेशकों को गिरफ्तार किया है।
कैसे काम करता था यह साइबर ठगी का नेटवर्क
यह गिरोह मेसर्स मेसिट ट्रेडेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी मुखौटा कंपनियों के जरिए अपना खेल चला रहा था। ठग कमजोर लोगों को नौकरी या कमीशन का लालच देकर उन्हें ‘डमी डायरेक्टर’ बना लेते थे। इन लोगों के नाम पर कंपनी और बैंक खाते खोले जाते थे, लेकिन उनका पूरा कंट्रोल, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी असली संचालकों के पास होता था। यह नेटवर्क देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से भी जुड़ा हुआ था।
कौन हुए गिरफ्तार और कहां से जुड़े हैं तार
पुलिस ने इस मामले में सोनू कुमार और अमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया है, जो कंपनी में फर्जी डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। जांच में पता चला है कि मेसिट ट्रेडेक्स प्राइवेट लिमिटेड के एक खाते से 336 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें जुड़ी हुई थीं। दिल्ली के पीतमपुरा, रानी बाग और नेताजी सुभाष प्लेस जैसे इलाकों को इस रैकेट के मुख्य केंद्र के रूप में देखा गया है।
पुलिस की चेतावनी और बचाव के तरीके
बाहरी उत्तरी जिले के डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने बताया कि ‘मिशन म्यूल हंटिंग’ के तहत ऐसे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम लोगों को सलाह दी है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता या KYC डिटेल शेयर न करें। साथ ही, किसी ऐसी कंपनी में डायरेक्टर बनने के लिए राजी न हों जिसके बारे में आपको पूरी जानकारी न हो।
Frequently Asked Questions (FAQs)
म्यूल बैंक खाता (Mule Account) क्या होता है?
यह ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी चोरी का पैसा इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं, ताकि असली अपराधी की पहचान छिपी रहे।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
पुलिस ने कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, केवाईसी विवरण न दें और न ही लालच में आकर किसी फर्जी कंपनी के डायरेक्टर बनें।