Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने सलीम वास्तिक नाम के एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 31 साल से कानून की नजरों से बच रहा था। यह मामला 1995 के एक किडनैपिंग और मर्डर के
Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने सलीम वास्तिक नाम के एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 31 साल से कानून की नजरों से बच रहा था। यह मामला 1995 के एक किडनैपिंग और मर्डर केस से जुड़ा है। आरोपी खुद को ‘Ex-Muslim’ बताता है और सोशल मीडिया पर यूट्यूबर के तौर पर एक्टिव था।
कौन है Saleem Wastik और क्या था पूरा मामला
सलीम वास्तिक, जिसे सलीम खान या सलीम अहमद भी कहा जाता है, 54 साल का है। 20 जनवरी 1995 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 13 साल के संदीप बंसल का अपहरण किया गया था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के लिए 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई थी। साल 1997 में अदालत ने सलीम और उसके साथी अनिल को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
कैसे हुआ गिरफ्तार और कहां छिपा था आरोपी
साल 2000 में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद सलीम वापस जेल नहीं गया और फरार हो गया। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद जैसी जगहों पर अलग-अलग नामों से रहा। उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद को मृत भी घोषित कर दिया था। हाल ही में फरवरी 2026 में लोनी, गाजियाबाद में उस पर चाकू से हमला हुआ था, जिसके बाद वह चर्चा में आया और पुलिस ने उसे 25 अप्रैल 2026 को धर दबोचा।
पुलिस ने कैसे की पहचान और अब क्या हुआ
डीसीपी (क्राइम) संजीव कुमार यादव ने बताया कि आरोपी की पहचान पुराने रिकॉर्ड, उंगलियों के निशान (fingerprints) और पुरानी तस्वीरों के जरिए की गई। इस गिरफ्तारी में इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी, एसीपी संजय कुमार नागपाल और हेड कांस्टेबल मिंटू यादव की अहम भूमिका रही। पुलिस ने साफ किया कि अपराधी चाहे कितने भी साल छिप जाए, कानून से बच नहीं सकता। अब सलीम वास्तिक को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सलीम वास्तिक ने कितने साल तक कानून को धोखा दिया
सलीम वास्तिक साल 2000 में अंतरिम जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था और लगभग 26 से 31 साल तक पुलिस से बचता रहा।
सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी कैसे संभव हुई
फरवरी 2026 में लोनी में उस पर हुए चाकू हमले के बाद वह चर्चा में आया, जिससे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को उसे ट्रैक करने में मदद मिली।