Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए अब सिर्फ सर्दियों का प्रदूषण ही चिंता का विषय नहीं रहा। अब गर्मियों में भी हवा जहरीली हो रही है और ओजोन प्रदूषण का खतरा तेजी से बढ़ा है। मई 2026 में शहर के कई इलाकों में ओजोन का स्तर
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए अब सिर्फ सर्दियों का प्रदूषण ही चिंता का विषय नहीं रहा। अब गर्मियों में भी हवा जहरीली हो रही है और ओजोन प्रदूषण का खतरा तेजी से बढ़ा है। मई 2026 में शहर के कई इलाकों में ओजोन का स्तर तय मानकों से काफी ऊपर पाया गया है, जिससे आम लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
दिल्ली के किन इलाकों में ओजोन का स्तर सबसे ज्यादा रहा
CREA के विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली के 45 निगरानी स्टेशनों में से 24 पर ओजोन का स्तर तय सीमा से ज्यादा दर्ज किया गया। पूसा में स्थिति सबसे खराब रही, जहां 8 घंटे का औसत 292 µg/m³ तक पहुंच गया, जो कि राष्ट्रीय मानक 100 µg/m³ से लगभग तीन गुना ज्यादा है। इसके अलावा आईएमडी लोधी रोड, नॉर्थ कैंपस और बुराड़ी क्रॉसिंग जैसे इलाकों में भी मई के महीने में करीब 20 से 25 दिनों तक प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहा।
ओजोन प्रदूषण से शरीर पर क्या असर पड़ता है
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ग्राउंड-लेवल ओजोन सीधे तौर पर सांस की नली में सूजन और नुकसान पहुंचा सकता है। इससे अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा ज्यादा हो जाता है। यह समस्या खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इसके लक्षणों में बेवक्त नींद आना, सिरदर्द और जलन महसूस होना शामिल है।
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार का क्या प्लान है
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि प्रदूषण से लड़ाई अब साल के 365 दिन चलेगी। सरकार ने 2028 तक दिल्ली में 14,000 स्वच्छ ईंधन बसें चलाने का लक्ष्य रखा है। वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दिल्ली के प्रदूषण में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर की है। CSE ने सुझाव दिया है कि ओजोन को भी अब GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के दायरे में लाना चाहिए ताकि समय रहते कदम उठाए जा सकें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ओजोन प्रदूषण दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है?
CREA के विश्लेषक मनोज कुमार के अनुसार, ओजोन सीधे उत्सर्जित नहीं होता। यह सूर्य की रोशनी में नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है।
ओजोन के लिए सुरक्षित राष्ट्रीय मानक क्या है?
भारत में ओजोन के लिए राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (8 घंटे का औसत) तय किया गया है।