Delhi: राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहर के पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम को स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है। इसका मतलब है कि जिस वाहन के पास
Delhi: राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहर के पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम को स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है। इसका मतलब है कि जिस वाहन के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) नहीं होगा, उसे पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी नहीं दिया जाएगा।
नियम कब से लागू हुआ और क्या है आदेश
दिल्ली सरकार ने 23 अप्रैल, 2026 को इस नियम को स्थायी करने का फैसला लिया। इससे पहले इसे 25 अक्टूबर, 2025 को पहली बार शुरू किया गया था और 18 दिसंबर, 2025 से सख्ती बढ़ाई गई थी। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के मुताबिक, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद पीयूसी सर्टिफिकेट होना जरूरी है। यह कदम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
जुर्माना और कार्रवाई के प्रावधान
नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई वाहन बिना पीयूसी के पाया जाता है या नियम तोड़ता है, तो उसके लिए भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
- नियम तोड़ने पर वाहन को जब्त भी किया जा सकता है।
- सभी पेट्रोल पंपों और गैस आउटलेट्स को इस नियम का पालन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का क्या कहना है
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि हवा को साफ और स्वस्थ बनाने के लिए ऐसे कड़े फैसले जरूरी हैं। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी अधिकारियों को इस नियम को पूरी सख्ती से लागू करने को कहा है। हालांकि, पेट्रोल पंप चलाने वालों ने कुछ चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि ग्राहकों के साथ विवाद होने का डर है और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।