Delhi: देशभर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर नए नियम लागू हो गए हैं। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 2026 जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं। अब उन लोगों या स
Delhi: देशभर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर नए नियम लागू हो गए हैं। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 2026 जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं। अब उन लोगों या संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है जो ज्यादा मात्रा में कूड़ा पैदा करते हैं।
किन्हें माना जाएगा बल्क वेस्ट जनरेटर और क्या है नियम
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई संस्था या सोसाइटी रोजाना 100 किलो या उससे ज्यादा ठोस कचरा निकालती है, तो उसे ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ माना जाएगा। इसके अलावा 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा एरिया वाले परिसर या रोजाना 40,000 लीटर से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वाले संस्थान भी इसी श्रेणी में आएंगे। ऐसे लोगों को अपने गीले कचरे का निपटारा खुद अपने परिसर में करना होगा। अगर यह संभव नहीं है, तो उन्हें EBWGR सर्टिफिकेट लेना होगा।
कचरा अलग करना होगा जरूरी, लापरवाही पर लगेगा जुर्माना
अब कचरे को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटना अनिवार्य होगा। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है। नियमों का पालन न करने वालों पर ‘प्रदूषक भुगतान करता है’ (Polluter Pays) सिद्धांत के आधार पर पर्यावरण मुआवजा लगाया जाएगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस जुर्माने की वसूली करेंगे।
Delhi में MCD ने शुरू की सख्ती
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने इन नियमों को लागू करना शुरू कर दिया है। MCD कमिश्नर ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और रेलवे समेत कई सरकारी और प्राइवेट संस्थानों को चिट्ठी भेजकर नियमों का पालन करने को कहा है। अब लैंडफिल में कचरा भेजने की शर्तों को भी 2026 के नए नियमों के हिसाब से बदल दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बल्क वेस्ट जनरेटर किसे कहा जाएगा
जो संस्थान रोजाना 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा निकालते हैं, या जिनका एरिया 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा है, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाएगा।
कचरे को कितने हिस्सों में बांटना होगा
कचरे को चार हिस्सों में बांटना होगा: गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट।