Delhi में नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल का आरोप, RAF ने शुरू की जांच
Delhi: राजधानी दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने और ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में अब रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। सीआरपीएफ
Delhi: राजधानी दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने और ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में अब रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। सीआरपीएफ ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया है, जिसमें जवानों और छात्रों के बीच झड़प दिख रही है।
यह घटना 20 जुलाई 2026 को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई थी, जिसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आयोजित किया था। प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सीआरपीएफ ने अब आरएएफ के महानिरीक्षक (IG) को पूरे घटनाक्रम और जवानों की कार्रवाई की जांच करने का निर्देश दिया है। फिलहाल तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है, जिसके बाद ही औपचारिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) के आदेश दिए जाएंगे।
इस पूरे मामले में अलग-अलग संस्थाओं के बयान सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से साफ इनकार किया है और कहा है कि उनके पास ऐसे हथियार नहीं हैं, उन्होंने सिर्फ आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। वहीं, केंद्र सरकार और पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया के दावों को भ्रामक बताया है। दूसरी तरफ, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और 20 जुलाई की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 जुलाई को घायल छात्र साहिल को मीडिया के सामने पेश किया और दावा किया कि पैलेट गन की वजह से उसकी आंख क्षतिग्रस्त हो गई है। अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल लोछब और शेख इरशाद मंसूरी जैसे छात्र पैलेट की चोटों का इलाज करा रहे हैं। आरएएफ के नियमों के अनुसार, पैलेट गन का इस्तेमाल सिर्फ बहुत चुनौतीपूर्ण स्थितियों में और शरीर के निचले हिस्से को निशाना बनाकर किया जाना चाहिए।